बागवान काका जहां जन्म के समय अपने परिवार से तिरस्कृत रहा, वहीं उसने मृत्यु के समय भी वही तिरस्कार देखा।
चार चार पुत्रों के होने के बावजूद भी वह किसी अन्य के हाथों अपने अंतिम संस्कार को प्राप्त हुआ।
आइए जानते हैं उसी कहानी को क्रमानुसार, जो अनेक कहानियों का सहयोग लेकर आगे बढ़ती है।
बागवान काका
लेखक
ॐ जितेंद्र सिंह तोमर