Monday, November 27, 2023

भजन –> श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े |
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े |
तोपे चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार, ओ धार,  तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

तेरे कानन कुंडल सोहे रहे,
तेरे कानन कुंडल सोहे रहे |
तेरे कानन कुंडल सोहे रहे |
तेरे कानन कुंडल साज रहे |
तेरी ठोड़ी पे, तेरी ठोड़ी पे हीरा लाल, ओ लाल, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

तेरे गले में कंठा सोहे रहो।
तेरे गले में कंठा सोहे रहो।
तेरे गले में कंठा सोहे रहो।
तेरे गले में कंठा सोहे रहो।
तेरी छाती, तेरी छाती बनी विशाल, ओ विशाल, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

तेरी सात कोस की परिकक्मा,
तेरी सात कोस की परिकक्मा |
तेरी सात कोस की परिकक्मा,
तेरी सात कोस की परिकक्मा |
और चकलेश्वर, और चकलेश्वर विश्राम, ओ विश्राम, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

कोई नंगे पैर करे परिकक्मा 
कोई नंगे पैर करे परिकक्मा 
कोई नंगे पैर करे परिकक्मा 
कोई नंगे पैर करे परिकक्मा 
कोई चंढे, कोई चंढे रे घोड़ा गाड़ी, ओ गाड़ी, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

लोट लोट कर धरा पे तेरी
लोट लोट कर धरा पे तेरी
लोट लोट कर धरा पे तेरी
लोट लोट कर धरा पे तेरी
करें दंडवत, करें दंडवत प्रणाम; ओ प्रणाम, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

तेरे माथे बिन्दा रोली को
तेरे माथे बिन्दा रोली को
तेरे माथे बिन्दा रोली को
तेरे माथे बिन्दा रोली को


श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

खुश होकर गाएं भक्त तुम्हारे
खुश होकर गाएं भक्त तुम्हारे
खुश होकर गाएं भक्त तुम्हारे
खुश होकर गाएं भक्त तुम्हारे
संग हरी दर्शन, संग हरी दर्शन परिवार; ओ परिवार, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ||

🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺


🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

तोपे पान चढ़ाऊं तोपे फूल चढ़ाऊं,
तोपे पान चढ़ाऊं तोपे फूल चढ़ाऊं,
तोपे पान चढ़ाऊं तोपे फूल चढ़ाऊं,,
तोपे पान चढ़ाऊं तोपे फूल चढ़ाऊं,
तोपे चढ़ाऊं, तोपे चढ़ाऊं दूध की धार, ओ धार,  
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

तेरे कानन कुंडल सोहे रहे,
तेरे कानन कुंडल सोहे रहे |
तेरे कानन कुंडल सोहे रहे |
तेरे कानन कुंडल साज रहे |
तेरी ठोड़ी पे, तेरी ठोड़ी पे हीरा लाल, ओ लाल, मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

तेरे गले में कंठा सोहे रहो।
तेरे गले में कंठा सोहे रहो।
तेरे गले में कंठा सोहे रहो।
तेरे गले में कंठा सोहे रहो।
तेरी छाती, तेरी छाती बनी विशाल, ओ विशाल, मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

तेरी सात कोस की परिकक्मा,
तेरी सात कोस की परिकक्मा |
तेरी सात कोस की परिकक्मा,
तेरी सात कोस की परिकक्मा |
और चकलेश्वर, और चकलेश्वर विश्राम, ओ विश्राम, मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

कोई नंगे पैर करे परिकक्मा 
कोई नंगे पैर करे परिकक्मा 
कोई नंगे पैर करे परिकक्मा 
कोई नंगे पैर करे परिकक्मा 
कोई चंढे, कोई चंढे रे घोड़ा गाड़ी, ओ गाड़ी,  मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

लोट लोट कर धरा पे तेरी
लोट लोट कर धरा पे तेरी
लोट लोट कर धरा पे तेरी
लोट लोट कर धरा पे तेरी
करें दंडवत, करें दंडवत प्रणाम; ओ प्रणाम,  मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

तेरे माथे बिन्दा रोली को
तेरे माथे बिन्दा रोली को
तेरे माथे बिन्दा रोली को
तेरे माथे बिन्दा रोली को
जामे दिए हैं अक्षत, जामे दिए हैं अक्षत डार, ओ डार , मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

खुश होकर गाएं भक्त तुम्हारे
खुश होकर गाएं भक्त तुम्हारे
खुश होकर गाएं भक्त तुम्हारे
खुश होकर गाएं भक्त तुम्हारे
संग हरी दर्शन, संग हरी दर्शन परिवार; ओ परिवार,  मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

श्री गोवर्धन महराज महराज,
मन तेरे दर्शन को तराश रह्यो ||

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श्री गोवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े, तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े, 
तोपे चढ़े दूध की धार, ओ धार, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो, 
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो।।

तेरे कानन कुंडल साज रहे, तेरे कानन कुंडल साज रहे, 
ठोड़ी पे हिरा लाल, ओ लाल, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो, 
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

तेरे गले में कंठा सोने को, तेरे गले में कंठा सोने को, 
तेरी झांकी बनी विशाल, विशाल, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो, 
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

तेरी सात कोस की परिक्रमा, तेरी सात कोस की परिक्रमा, 
और चकलेश्वर विश्राम, विश्राम, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो, 
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

श्री गोवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

//श्री गिरिराज धरण की जय//



श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार ।

तेरी सात कोस की परिकम्मा,
चकलेश्वर है विश्राम ।

तेरे गले में कंठा साज रेहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल ।

तेरे कानन कुंडल चमक रहेओ,
तेरी झांकी बनी विशाल ।

गिरिराज धारण प्रभु तेरी शरण ।








श्री गोवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े, तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े, 
तोपे चढ़े दूध की धार, ओ धार, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो, 
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो।।

तेरे कानन कुंडल साज रहे, तेरे कानन कुंडल साज रहे, 
ठोड़ी पे हिरा लाल, ओ लाल, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो, 
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

तेरे गले में कंठा सोने को, तेरे गले में कंठा सोने को, 
तेरी झांकी बनी विशाल, विशाल, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो, 
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

तेरी सात कोस की परिक्रमा, तेरी सात कोस की परिक्रमा, 
और चकलेश्वर विश्राम, विश्राम, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो, 
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

श्री गोवर्धन महाराज महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।।

//श्री गिरिराज धरण की जय//



श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ।

तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार ।

तेरी सात कोस की परिकम्मा,
चकलेश्वर है विश्राम ।

तेरे गले में कंठा साज रेहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल ।

तेरे कानन कुंडल चमक रहेओ,
तेरी झांकी बनी विशाल ।

गिरिराज धारण प्रभु तेरी शरण ।

प्राचीन भजन भाग 1

प्राचीन भजन भाग 1

भजन-संग्रह

( १ )

सब मिलके श्राज जय कहो, श्री वीर प्रभु को । 
मस्तक झुका के जय कहो, श्री वीर प्रभु की ॥टेक।।

विघ्नों का नाश होता है, लेने से नाम के । 
माला सदा जपते रहो, श्री वीर प्रभु की ॥१॥

ज्ञानी बनो दानी बनो, बलवान मी बनो ।
अकलंक सम बन जय कहो, श्री वीर प्रभु की ॥२॥ 

होकर स्वतंत्र धर्म की, रक्षा सवा करो । 
निर्भय बनो अरु जय कहो, श्री वीर प्रभु की ॥३॥

तुमको मी अगर मोक्ष को, इच्छा हुई है 'दास' । 
उस वाणी पर श्रद्धा करो, श्री वीर प्रभु की ॥४।॥

(२)

जिन वाणी मुक्ति नसैनी है, जिन वाणी ।। टेक ॥ 
यह भववधि से पार उतारन, पर भव को सुख वानी है ॥१।।
मिथ्यातिन के मनहि न श्रावै, भविजन के मन मानी है ॥२ 
धर्म कुधर्म की समझ परें सब, जुदिय जुविय कर मानी है ॥३ 'वाजूराय' मजो जिन वाणी, सुख कर्ता दुख हानी है ॥४

( ३ ) 
निरखत निज-चन्द्र-ववन, स्व-पर सुरुचि आाई ।। टेक ।। 
प्रगटी निज श्रान की, पिछान ज्ञान-मान की । 
कला उद्योत होत काम, यामिनी पलाई ॥१॥ 
सास्वत श्रानन्द स्वाद, पायो विनस्यो विषाद । 
आान में अनिष्ट इष्ट, कल्पना नसाई ॥२॥ 
साधी निज साध को, समाधि मोह व्याधि को । 
उपाधि को विराधिके, अराधना सुहाई ॥३॥ 
धन दिन छिन आाज सुगुनि, चिते जिनराज अबै । 
सुधरे सब काज 'दौल', अचल सिद्धि पाई ॥४॥ 

( ४ )

जब ते श्रानन्द जननि दृष्टि परो माई । 
तब ते संशय विमोह भरमता विलाई ।॥ टेक ॥ 
मैं हूँ चित चिह्न, मिन्न परतें, पर जड स्वरूप । 
वोउन की एकता सु, जानी दुखदाई ॥१॥ 
रागादिक बंधहेत, बंधन बहु विपत देत । 
संबर हित जान तासु, हेतु ज्ञान ताई ॥२॥ 
सब सुख मय शिव है तसु, कारन विधि भारन इमि । 
तत्व की विचारन जिन-वानि सुधि कराई ॥३॥ 
विषय चाह ज्वाल ते, वह्यो अनन्त कालते । 
सुधांशु स्यात्पदांक गाह-तै, प्रशांति भाई ॥४॥
या बिन जग जालमें न, शरन तीन कालमें । 
संभाल चित मजो सदीव, 'बोल' यह सुहाई ॥ ५ ॥

( ५ )

जोव तू अनादि हो ते भूल्यौ शिव गैलवा ॥ टेक ॥ 
मोहमव बार पियो, स्वपद विसार दियौ । 
पर अपनाय लियौ, इन्द्री सुखमें रचियो । 
भवते न भियौ न तजियौ मन मैलवा ॥ १ ॥ 
मिथ्या ज्ञान श्राचरन, घरिकर कुमरन ।

तीन लोक को धरन, तामें कियो मैं फिरन । 
पायौ न शरन लहायौ सुख शैलका ॥ २ ॥ 
अब नर भव पायो, सुथल सुकुल आयौ । 
जिन उपदेश मायो, 'दोल' झट छिटकायो । 
पर परनति दुखदायिनी चुरैलवा ॥ ३ ॥ ( ६ )

श्रापा नहि जाना तूने, कैसा ज्ञानधारी रे ॥ टेक ॥ 
बेहाश्रित करि किया श्रापको, मानत शिवमगचारी रे ॥१ 
निज-निवेद विन घोर परीषह, विफल कहो जिन सारी रे ॥२ शिव चाहे तो द्विविधिकर्म है, कर निजपरनति न्यारी रे ॥३ 'दौलत' जिन निजमाव पिछान्यौ, तिन मवविपत बिदारीरे ॥४

(७)

आतम रूप अनूपम अद्भुत, याहि लखै भर्वासषु तरो ॥टेक ।।
अल्पकाल में मरत चक्रघर, निज आतम को ध्याय खरो । केवल ज्ञान पाय मवि बोधे, ततछिन पायो लोक शिरो ॥१ या बिन समुझे द्रव्य लिग मुनि, उम्र तपन कर मार मरो । नवग्रीवक पर्यन्त जाय चिर, फेर मवार्णव माहि परो ॥२ सम्यग्दर्शन ज्ञान चरन तप, येहि जगत में सार नरो । पूरव शिव को गये जाहि अब, फिर जैहैं यह नियत करो ॥३ कोटि ग्रन्थ को सार यही है, येही जिनवानी उचरो । 'वौल' ध्याय अपने श्रतम को, मुक्तरमा तब वेग वरो ॥४ () 

(८)

आप भ्रम विनाश आप आप जान पायौ। कर्णघृत सुवर्ण जिमि चितार चैन थायौ ।॥ टेक ॥ 

मेरो तन तनमय तन मेरो मैं तन को त्रिकाल । 
कुबोध नश सुबोध मान जायो ।॥ १ ॥

यह सुजैन वैन ऐन, चिन्तन पुनि पुनि सुनैन । 
प्रगटो अब मेव निज, निवेद गुन बढ़ायो ।॥ २॥

यों हो चित श्रचित मिश्र, ज्ञेय ना अहेय हेय । 
ईंधन घनंज जैसे, स्वामि योग गायो ।॥ ३ ॥ 

भंवर पोत छुटत झटति, बांछित तट निकट जिमि । 
मोहराग रुख हर जिय, शिवतट निकटायौ ।॥ ४ ॥ 

विमल सौख्यमय सदीव, मैं हूँ मैं नहि अजीव ।
जोत होत रज्जुमय, भुजंग भय मगायो ॥ ५ ॥

Friday, November 3, 2023

भजन –> नगर में जोगी आया


ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे 
ऊँचा है तेरा धाम 
हे कैलाश के वासी भोलेबाबा 
हम सब करते है तुम्हे प्रणाम 

नगर में जोगी आया 
भेद कोई समझ ना पाया 
अजब है तेरी माया 
सब से बड़ा है तेरा नाम 
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ

अंग विभुती गले रूद्र माला 
शेषनाग लिपटाओ, 
सिर पे गंगा भाल चन्द्रमा 
घर घर अलख जगायो 
यशोदा के घर आया, 
आके अलख जगाया
सब से बड़ा है तेरा नाम 
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ

ले भिक्षा निकली नंदरानी 
कंचन थाल भरायो 
ले भिक्षा जा जोगी आसन 
मेरो लाल डरायो 
नगर में जोगी आया भेद 
कोई समझ ना पाया
सब से बड़ा है तेरा नाम 
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ  

ना चाहिए तेरी दौलत दुनिया 
ना ही कंचन माया
अपने लाल का दरश करादे 
मै दर्शन को आया 
नगर में जोगी आया 
भेद कोई समझ ना पाया 
सब से बड़ा है तेरा नाम 
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ

तिन लोक के कर्ताधर्ता 
तेरी गोद में आया 
सूरदास बलिहारी कन्हैया 
यशोमती दिखलाया 
नगर में जोगी आया 
भेद कोई समझ ना पाया 
सब से बड़ा है तेरा नाम 
भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ

Thursday, November 2, 2023

भजन –> सारे तीरथ धाम आपकेऽ चरणों मेंऽऽ,

भाग 01
🌺🌺🌺🌺🌺🪷🪷🪷🪷🪷🌺🌺🌺🌺🌺
सारे तीरथ धाम आपकेऽ चरणों मेंऽऽ,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ।।
🌺🌺🌺🌺🌺🪷🪷🪷🪷🪷🌺🌺🌺🌺🌺

सारे तीरथ धाम आपकेऽ चरणों मेंऽऽ,
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ।।
चरणो मेंऽ ।।
सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ।।

ह्रदय मेंऽ माँ गौरी लक्ष्मी, कंठ शारदा माता हैऽ, 2
जो भी मुख से वचन कहें, 
वो वचन सिद्ध हो जाता है,
वचन सिद्ध हो जाता है, 
है गुरु ब्रह्मा है गुरु विष्णुऽऽऽ 
है गुरु ब्रह्मा है गुरु विष्णु, है शंकर भगवान आपके चरणो मेंऽ, 
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ।।
चरणो मेंऽ ।।
सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ।।

जनम के दाता मात पिता है, आप करम केऽ दाता है, 2
आप मिलाते है ईश्वर से, आप ही भाग्य विधाता हैंऽऽ, 
आप ही भाग्य विधाता हैंऽऽ, 
दुखिया मन को रोगी तन कोऽऽ, 
दुखिया मन को रोगी तन को, मिलता है आराम आपके चरणो मेंऽऽ, 
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणोऽ में ।।
चरणोऽ में ।।
.....2

निर्बल को बलवान बना दोऽऽ, मूर्ख को गुणवान प्रभु, 2
'श्रोता' और 'दर्शक' को भी, 
ज्ञान का दो वरदान प्रभुऽ, 
ज्ञान का दो वरदान प्रभु
हे महादानी हे महाज्ञानीऽऽऽ, 
हे महादानी हे महाज्ञानी, 
रहूँ मैं सुबहो श्याम आपके चरणो मेंऽ, हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ।।
चरणो मेंऽ ।।

दोहा 
कर्ता करे न कर सके, पर गुरु करे सब होय, 
सात द्वीप और नौ खंड में, गुरु से बड़ा ना कोयऽऽ ।
प्यारे गुरु से बड़ा ना कोय ।

मैं तो सात समुन्द्र की मसि करूं, लेखनी सब वन राय, 
सब धरती कागज़ करूँ, पर गुरु गुण लिखा ना जाए।।
प्यारे गुरु गुण लिखा ना जाए।।

सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ।।

सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे गुरुदेव प्रणाम आपके चरणो में ।।
मेरे बाबा हाय।
मेरे बाबाऽऽ
मेरे बाबाऽऽ
मेरे बाबाऽऽ
मेरे बाबाऽऽऽऽ

भाग 02
🌺🌺🌺🌺🌺🪷🪷🪷🪷🪷🌺🌺🌺🌺🌺
सारे तीरथ धाम आपकेऽ चरणों मेंऽऽ,
हे भोलेनाथ प्रणाम आपके चरणो में ।।
🌺🌺🌺🌺🌺🪷🪷🪷🪷🪷🌺🌺🌺🌺🌺


सारे तीरथ धाम आपकेऽ चरणों मेंऽऽ,
हे भोलेनाथ प्रणाम आपके चरणो में ।।
चरणो मेंऽ ।।
सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे भोलेनाथ प्रणाम आपके चरणो में ।।

ह्रदय मेंऽ माँ गौरी, लक्ष्मी, कंठ शारदा माता हैऽ, 2
जो भी मुख से वचन कहें, 
वो वचन सिद्ध हो जाता है,
वचन सिद्ध हो जाता है, 
हे गुरु ब्रह्मा हे गुरु विष्णुऽऽऽ 
हे गुरु ब्रह्मा हे गुरु विष्णु, हे शंकर भगवान आपके चरणो मेंऽ, 
हे भोलेनाथ प्रणाम आपके चरणो में ।।
चरणो मेंऽ ।।
सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे भोलेनाथ प्रणाम आपके चरणो में ।।

जनम के दाता मात पिता है, आप करम केऽ दाता है, 2
आप मिलाते है ईश्वर से, आप ही भाग्य विधाता हैंऽऽ, 
आप ही भाग्य विधाता हैंऽऽ, 
दुखिया मन को रोगी तन कोऽऽ, 
दुखिया मन को रोगी तन को, मिलता है आराम आपके चरणो मेंऽऽ, 
हे भोलेनाथ प्रणाम आपके चरणोऽ में ।।
चरणोऽ में ।।
.....2

निर्बल को बलवान बना दोऽऽ, मूर्ख को गुणवान प्रभु, 2
'श्रोता' और 'दर्शक' को भीऽऽ, 
'श्रोता' और 'दर्शक' को भी
ज्ञान का दो वरदान प्रभुऽ, 
ज्ञान का दो वरदान प्रभु
हे महादानी हे महाज्ञानीऽऽऽ, 
हे महादानी हे महाज्ञानी, 
रहूँ मैं सुबहो श्याम आपके चरणो मेंऽ, हे भोलेनाथ प्रणाम आपके चरणो में ।।
चरणो मेंऽ ।।

दोहा 
कर्ता करे न कर सके, पर बाबा करे सब होय, 
सात द्वीप और नौ खंड में, बाबा से बड़ा ना कोयऽऽ ।
प्यारे बाबा से बड़ा ना कोय ।

मैं तो सात समुन्द्र की मसि करूं, लेखनी सब वन राय, 
सब धरती कागज़ करूँ, पर शिव गुण लिखा ना जाए।।
प्यारे शिव गुण लिखा ना जाए।।

सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे भोलेनाथ प्रणाम आपके चरणो में ।।

सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे भोलेनाथ प्रणाम आपके चरणो में ।।
मेरे बाबा हाय।
मेरे बाबाऽऽ
मेरे बाबाऽऽ
मेरे बाबाऽऽ
मेरे बाबाऽऽऽऽ



भाग 03
🌺🌺🌺🌺🌺🪷🪷🪷🪷🪷🌺🌺🌺🌺🌺
सारे तीरथ धाम आपकेऽ चरणों मेंऽऽ,
हे श्रीजी प्रणाम आपके चरणो में ।।
🌺🌺🌺🌺🌺🪷🪷🪷🪷🪷🌺🌺🌺🌺🌺


सारे तीरथ धाम आपकेऽ चरणों मेंऽऽ,
हे श्रीजी प्रणाम आपके चरणो में ।।
चरणो मेंऽ ।।
सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे श्रीजी प्रणाम आपके चरणो में ।।

ह्रदय मेंऽ कीर्ति, गौरी, लक्ष्मी, कंठ शारदा माता हैऽ, 
ह्रदय मेंऽ कीर्ति, गौरी, लक्ष्मी, कंठ शारदा माता हैऽ, 
जो भी मुख से वचन कहें, 
वो वचन सिद्ध हो जाता है,
वचन सिद्ध हो जाता है, 
हे गुरु ब्रह्मा हे गुरु विष्णुऽऽऽ 
हे गुरु ब्रह्मा हे गुरु विष्णु, हे शंकर भगवान आपके चरणो मेंऽ, 
हे श्रीजी प्रणाम आपके चरणो में ।।
चरणो मेंऽ ।।
सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे श्रीजी प्रणाम आपके चरणो में ।।

जनम के दाता मात पिता है, आप करम केऽ दाता है, 2
आप मिलाते है ईश्वर से, आप ही भाग्य विधाता हैंऽऽ, 
आप ही भाग्य विधाता हैंऽऽ, 
दुखिया मन को रोगी तन कोऽऽ, 
दुखिया मन को रोगी तन को, मिलता है आराम आपके चरणो मेंऽऽ, 
हे श्रीजी प्रणाम आपके चरणोऽ में ।।
चरणोऽ में ।।
.....2

निर्बल को बलवान बना दोऽऽ, मूर्ख को गुणवान प्रभु, 2
'श्रोता' और 'दर्शक' को भीऽऽ, 
'श्रोता' और 'दर्शक' को भी
ज्ञान का दो वरदान प्रभुऽ, 
ज्ञान का दो वरदान प्रभु
हे महादानी हे महाज्ञानीऽऽऽ, 
हे महादानी हे महाज्ञानी, 
रहूँ मैं सुबहो श्याम आपके चरणो मेंऽ, हे श्रीजी प्रणाम आपके चरणो में ।।
चरणो मेंऽ ।।

दोहा 
कर्ता करे न कर सके, पर बाबा करे सब होय, 
सात द्वीप और नौ खंड में, श्रीजी से बड़ा ना कोयऽऽ ।
प्यारे श्रीजी से बड़ा ना कोय ।

मैं तो सात समुन्द्र की मसि करूं, लेखनी सब वन राय, 
सब धरती कागज़ करूँ, पर श्रीजी गुण लिखा ना जाए।।
प्यारे श्रीजी गुण लिखा ना जाए।।

सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे श्रीजी प्रणाम आपके चरणो में ।।

सारे तीरथ धाम आपके चरणों में, 
हे श्रीजी प्रणाम आपके चरणो में ।।
मेरे बाबा हाय।
मेरे बाबाऽऽ
मेरे बाबाऽऽ
मेरे बाबाऽऽ
मेरे बाबाऽऽऽऽ


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