Thursday, September 29, 2022

भजन - एक दिन बुढ़ापा आयेगा रे धोखा देगी जवानी

एक दिन बुढ़ापा आयेगा रे धोखा देगी जवानी

पहला बुढ़ापा तेरे बालो में आए
बालो में आए तेरे बालो में आए 
डाई से 
डाई से लाज बचाएगा रे धोखा देगी जवानी
एक दिन बुढ़ापा आयेगा रे धोखा देगी जवानी

दूजा बुढ़ापा तेरे नैनो मे आए
नैनो में आए तेरे नैनो में आए
चश्मे से
चश्मे से लाज बचाए रे धोखा देगी जवानी
एक दिन बुढ़ापा आयेगा रे धोखा देगी जवानी

तीजा बुढ़ापा तेरे दांतों मे आए
दांते में आए तेरे दांतों में आए
लपसी ने
लपसी ने जान बचाए रे धोखा देगी जवानी
एक दिन बुढ़ापा आयेगा रे धोखा देगी जवानी

चौथा बुढ़ापा तेरे चेहरे पे आए
चेहरे पे आया तेरे मुखड़े पे आए
फैशियल से
फैशियल से लाज बचाए रे धोखा देगी जवानी
एक दिन बुढ़ापा आयेगा रे धोखा देगी जवानी

पांचवा बुढ़ापा तेरे घुटनों में आए 
घुटनों में आए तेरे पैरो में आए 
लाठी से 
लाठी से लाज बचाए रे धोखा देगी जवानी
एक दिन बुढ़ापा आयेगा रे धोखा देगी जवानी

आखरी बुढ़ापा तेरी आयु में आए 
आयु में आए तेरी उम्र पे आए 
भजन ही
भजन ही लाज बचाए रे धोखा देगी जवानी
एक दिन बुढ़ापा आयेगा रे धोखा देगी जवानी

Monday, September 12, 2022

भजन - मेरे बालापन के यार सुदामा कैसे आयो।

उदयवीर जी भुडिया (मुड़िया) गांव से से मुड़िया पुनो के मेले से।

देख पांव बिवाई, लियो है गले चिपटाई
देख पांव बिवाई, लियो है गले चिपटाई । अरे 
पूछ रहे करतार, सुदामा कैसे आयो।

मेरे बालापन के यार सुदामा कैसे आयो।
सुदामा कैसे आयो, सुदामा कैसे आयो।
मेरे बालापन के यार सुदामा कैसे आयो।

भर जेट मिले प्रभु ऐसे, जैसे राम भरत दौ ऐसे
भर जेट मिले प्रभु ऐसे, जैसे राम भरत दौ ऐसे। अरे
रहो नैनन नीर चुचाया, सुदामा कैसे आयो
मेरे बालापन के यार, सुदामा कैसे आयो।

पैर सुदामा के धोए, छाले देख देख के रोए,
पैर सुदामा के धोए, छाले देख देख के रोए। अरे
दियो है आसन पर पधराय, सुदामा कैसे आयो।
मेरे बालापन के यार, सुदामा कैसे आयो।

भाभी ने कहा पठायो, तने मौकू नाय बतायो
भाभी ने कहा पठायो, तने मौकू नाय बतायो । अरे
चोरी भूले ना गम ख्वार, सुदामा कैसे आयो
मेरे बालापन के यार, सुदामा कैसे आयो।

दबी काख पोठरी छीनी, प्रभु ने जब वो खोली 
दबी काख पोठरी छीनी, प्रभु ने जब वो खोली । अरे 
चावर खान लगे करतार, सुदामा कैसे आयो
मेरे बालापन के यार सुदामा कैसे आयो।

पहली मुट्ठी खाई, दूजीउ गए चबाई
पहली मुट्ठी खाई, दूजीउ गए चबाई। अरे 
तीजी रोकें रुकमणी नार, सुदामा कैसे आयो
मेरे बालापन के यार, सुदामा कैसे आयो।

इस पर रुकमणी बोली हैं -

दो लोक मित्र को दिए, कुछ राखो अपने लिए
दो लोक मित्र को दिए, कुछ राखो अपने लिए। अरे 
मेरी मानो श्री भगवान, सुदामा कैसे आयो
तयारो बालापन को यार, सुदामा कैसे आयो।





तन्ने क्यो तकलीफ़ उठाई,
तेरे पावा पटी बिवाई,
मैं ये पूछूँ बारम्बार,
सुदामा कैसे आए,
ओ मेरे बालेंपन के यार,
सुदामा कैसे आए।।




दोनो मिल रहे भुजा पसार
सुदामा कैसे आए,
ओ मेरे बालेंपन के यार,
सुदामा कैसे आए।।


जब आसन बीच बिठाया,
छत्तीसों भोजन लाया
दोनों जीमें करके प्यार,
सुदामा कैसे आए,
ओ मेरे बालेंपन के यार,
सुदामा कैसे आए।।

*गंगा स्नान हरिद्वार के सेवा शुल्क में ₹100 की छूट*  🚩 *श्री गणेशायः नमः* 🚩 🌹 *कार्तिक* मास में *हरिद्वार* में पवित्र *गंगा स्नान* जाने क...