Tuesday, August 26, 2025

केले की सगाई'

केले की सगाई' की सांगोपांग कल्पना गीन ऐसा ही है-

केले की भई ऐ सगाई सकलकन्दी नाचन आई 
"कासीफल के बने नगाड़े भिण्डी की चोब बनाई 
गोभी फूल के गड़े सिमाने, मूरी के खम्भ लगाए । 
गाजर बिचारी कें लाल भए ऐं आलू ओछक लाए । 
गाँड़े बिचारे नें भेली बाँधी, गेहूँ के गूंजे भराए । 
बेर बुरकली के भाँड़ बराती, मूंगफली रंडी बनाई । 
मक्का बिचारी के साल दुसाले, ज्वार लडुए बँधाए । 
चार बाजरे के डोम मीरासी, नटिनी नाचन आई ।

Tuesday, August 12, 2025

हर हर महादेव शंभो। शंकर जगत बन्धु जगदीशा,सुर नर मुनि सब नावहि शीशा।

हर हर महादेव शंभो।
शंकर जगत बन्धु जगदीशा,
सुर नर मुनि सब नावहि शीशा।

जय शंभूनाथ दिगम्बरम् करुणाकरं जगदीश्वरम्।
भवतारणं भयहारणं करुणाकरं जगदीश्वरम्॥

मृगछाल अंग सुशोभितं करमाल दण्ड विराजतम्।
यमकाल पाशविमोचकं करुणाकरं जगदीश्वरम्॥

जय शंभूनाथ दिगम्बरम् करुणाकरं जगदीश्वरम्।
गलमुण्डमाल कपालब्याल तनभस्मशोभित सुन्दरम्।

तव शक्ति अंग सुशोभितं जयशंभूनाथ दिगम्बरम्॥
हे दक्षयज्ञ विनाशकं हे कामदाहन कारणम्।
श्रीगणेश स्कंद नमस्कृतं करुणाकरं जगदीश्वरम्॥

हे आशुतोष शशांकशेखर चंद्रमौलिमृत्युंजयम्। 
तवपादकमल नमाम्यहं करुणाकरं जगदीश्वरम्॥

जय शंभूनाथ दिगम्बरं करुणाकरं जगदीश्वरम्।
भवतारणं भयहारणं करुणाकरं जगदीश्वरम्॥

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Thursday, August 7, 2025

दूरी ना रहे कोई आज इतने करीब आओ | लिरिक्स | फिल्म से

दूरी ना रहे कोई 
आज इतने करीब आओ 
मैं तुम में समा जाऊँ 
तुम मुझ में समा जाओ

सांसों की हरारत से तनहाई पिघल जाए 
जलते हुए होंठों का अरमान निकल जाए 
चाहत की घटा बन कर यूँ मुझपे बरस जाओ

मैं तुम में समा जाऊँ 
तुम मुझ में समा जाओ

ये बात न थी अबसे पहले कभी जीने में 
दिल बन के धड़कते हो तुम्हीं मेरे सीने में 
कभी साथ न छोड़ोगे तुम मेरी कसम खाओ

मैं तुम में समा जाऊँ 
तुम मुझ में समा जाओ
दूरी ना रहे कोई 
आज इतने करीब आओ 
मैं तुम में समा जाऊँ 
तुम मुझ में समा जाओ

Saturday, August 2, 2025

भजन –> ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।

भोरी सखी के पद 
(३०८)
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।

बिनु पद-कंज छटा दृग देखे, कोऊ सुहावै नाहीं ।॥ 
नाम रटै दृग ढारैं आँसू, दिन-छिन अति अकुलाहीं। 
काहू सौं मिलिवौ न सुहावै, बातन सौं घबराहीं ।॥ 
बस्ती छोड़ि एकान्त बैठिवौ, जग सब शून्य दिखाहीं
'भोरी' ऐसे दुख बिनु प्यारी, जीवन जन्म वृथा ही।

भोरी सखी के पद 
(३०८)

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भाग 1

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ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।

जैसा सुख दशरथ ने पायो, जैसा सुख दशरथ हैं पायो।
राम दरश किए बिनु, राम दरश किए बिनु, 
कोऊ सुहावै नाहीं ।॥ 

ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।

जैसा सुख कौशल्या ने पायो।, जैसा सुख कौशल्या ने पायो।
 राम हिय बिनु लगाए, राम हिय बिनु लगाए, 
दिन निकसत नाई ।॥ 

ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।

जैसा सुख लक्ष्मन ने पायो।, जैसा सुख लक्ष्मन ने पायो।
राम सेवा किए बिनु राम सेवा, राम सेवा किए बिनु 
चैन परत नाई ।॥ 

ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।

जैसा सुख जनकजी ने पायो।, जैसा सुख जनकजी ने पायो।
स्वयंवर में जनकपुरी के,  स्वयंवर में जनकपुरी के,    
जब राम भये जवांई ।॥ 

ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।

जैसा सुख सीता ने पायो।, जैसा सुख सीता ने पायो।
एक ही स्वयंवर में जब, एक ही स्वयंवर में जब, 
गई चारों बहने ब्याहीं 

ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।

जैसा सुख अयोध्या ने पायो।, जैसा सुख अयोध्या ने पायो।
चार चार बहुओं के आने पर, चार चार बहुओं के आने पर, 
जब दुल्हन सी गई सजाई 

ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।

जैसा सुख अयोध्यावासियों ने पायो।, जैसा सुख अयोध्यावासियों ने पायो।
जब चारों कुंवर संग देखी, जब चारों कुंवर संग देखी, 
चार राजकुमारियां आईं।

ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।

वैसा ही सुख जितेन्द्र मांगे, वैसा ही सुख जितेन्द्र मांगे 
क्षणभंगुर नहीं चिरकालिक हो, क्षणभंगुर नहीं चिरकालिक हो, 
सेवा चरणों कीऽ रघुराई ।
वैसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
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भाग 2

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ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।

जैसी कृपा करी देवकी पर, जैसी कृपा करी देवकी पर।
कैसी कृपा 
जगत खेले जिनकी गोद में, जगत खेले जिनकी गोद में ।
वो उनको गोद खिलाई। 
प्रभु जी
वो तुमको गोद खिलाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।

जैसी कृपा करी गोपिन पर, जैसी कृपा करी गोपिन पर।
कैसी कृपा 
गौलोक के महाराजा को, गौलोक के महाराजा को।
खिलाएं दही, दूध, मलाई।
प्रभु जी
वो तुमको अपने हाथ पवाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।

जैसी कृपा द्रौपदी पर कीन्हीं, जैसी कृपा द्रौपदी पर कीन्हीं।
कैसी कृपा 
घिरी सभा में जब वह इकली, घिरी सभा में जब वह इकली। दौड़कर लाज बचाई।
जब उसने कृपा तुम्हारी ।
प्रभु जी
तुमने लाज बचाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।

जैसी कृपा करी पांडवन पर, जैसी कृपा करी पांडवन पर।
कैसी कृपा 
महाभारत दीनी जिताई, उनको महाभारत दीनी जिताई।
तुम्हारी कृपा से राजगद्दी पाई।
प्रभु जी
तुमने राजगद्दी दिलाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।

जैसी कृपा करी उत्तरा पर, जैसी कृपा करी उत्तरा पर।
कैसी कृपा 
अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से, अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से,।
उसकी  कोख बचाई।
प्रभु जी
कौख में जाकर तुमने परीक्षित की जान बचाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।

जैसी कृपा करी सुदामा पर, जैसी कृपा करी सुदामा पर।
कैसी कृपा 
तीन मुट्ठी तंदुल खाकर, उसके तीन मुट्ठी तंदुल खाकर,
दे दी तीन लोकों की ठकुराई। 
प्रभु जी
उसको पता भी लगन न पाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।


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भाग 3
भोरी सखी का विरह
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ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी 
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।

बिनु पद-कंज छटा दृग देखे, बिनु पद-कंज छटा दृग देखे, 
कोऊ सुहावै नाहीं , कोऊ सुहावै नाहीं ।॥ 

ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी 
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।

नाम रटै दृग ढारैं आँसू, नाम रटै दृग ढारैं आँसू, 
दिन-छिन अति अकुलाहीं, दिन-छिन अति अकुलाहीं। 

ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी 
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।

काहू सौं मिलिवौ न सुहावै, काहू सौं मिलिवौ न सुहावै, 
बातन सौं घबराहीं, बातन सौं घबराहीं ।॥ 

ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी 
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।

बस्ती छोड़ि एकान्त बैठिवौ, बस्ती छोड़ि एकान्त बैठिवौ, 
जग सब शून्य दिखाहीं, जग सब शून्य दिखाहीं

ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी 
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।

'भोरी' ऐसे दुख बिनु प्यारी, 'भोरी' ऐसे दुख बिनु प्यारी
जीवन जन्म वृथा ही, जीवन जन्म वृथा ही।

ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
राधा 
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।

भजन –> बाबा तेरे ही भरोसे मेरी नाव, सागर में नैया डाल दै।

बाबा तेरे ही भरोसे भोलेनाथ, सागर में नैया डाल दै।

काहे की तो नाव बनाई काहे की पतवार।
भोले, काहे की लगाई जंजीर, सागर में नैया डाल दै।
वामे, काहे की लगाई जंजीर, सागर में नैया डाल दै।

काठ की तो नाव बनाई बांस की पतवार
काठ की तो नाव बनाई बांस की पतवार
बाबा, काठ की तो नाव बनाई बांस की पतवार
वामे, लोहे की लगाई जंजीर, सागर में नैया डाल दै।
वामे, लोहे की लगाई जंजीर, सागर में नैया डाल दै।

बाबा तेरे ही भरोसे भोलेनाथ सागर में नैया डाल दै।
राम बैठे, लक्ष्मण बैठे और सीता बैठी साथ।
मेरा भोला चलावे मेरी नाव, सागर में नैया डाल दै।
मेरा बाबा चलावे बेड़ा पार, सागर में नैया डाल दै।

काहे की तो नाव बनाई काहे की पतवार।
भोले, काहे की लगाई जंजीर, सागर में नैया डाल दै।
भक्तों, काहे की लगा दी जंजीर, सागर में नैया डाल दै।
काठ की तेरी नाव बनी है बांस की पतवार । 
काठ की तेरी नाव बनी है बांस की पतवार । 

विष्णु बैठे, लक्ष्मी बैठी, नारद बैठे साथ
विष्णु बैठे, लक्ष्मी बैठी, नारद बैठे साथ
काहे की तो नाव बनाई काहे की पतवार।
भोले, काहे की लगाई जंजीर, सागर में नैया डाल दै।
मेरा बाबा चलावे मेरी नाव, सागर में नैया डाल दै।
बाबा तेरे ही भरोसे मेरी नाव, सागर में नैया डाल दै।

काहे की तो नाव बनी है, काहे की पतवार।
काहे की तो नाव बनी है, काहे की पतवार।
भोले, काहे की लगाई जंजीर, सागर में नैया डाल दै।
काठ की तेरी नाव बनी है बांस की पतवार । 
काठ की तेरी नाव बनी है बांस की पतवार । 
बाबा, लोहे की लगाई जंजीर, सागर में नैया डाल दै। 2

राधा बेठी, रुक्मण बैठी, कृष्णा बैठे साथ। 
राधा बेठी, रुक्मण बैठी, कृष्णा बैठे साथ। 
मेरा बाबा चलावे मेरी नाव, सागर में नैया डाल दै।
बाबा तेरे ही भरोसे मेरी नाव, सागर में नैया डाल दै।

बाबा तेरे ही भरोसे भोलेनाथ, सागर में नैया डाल दै।

ससुर बैठे, ससुल बैठी, बहुएं बैठी साथ । 
ससुर बैठे, ससुल बैठी, बहुएं बैठी साथ । 
मेरा बाबा चलावे मेरी नाव, सागर में नैया डाल दै।
मेरा बाबा लगावे बेड़ा पार, सागर में नैया डाल दै।

बाबा तेरे ही भरोसे भोलेनाथ, सागर में नैया डाल दै।











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