भोरी सखी के पद
(३०८)
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
बिनु पद-कंज छटा दृग देखे, कोऊ सुहावै नाहीं ।॥
नाम रटै दृग ढारैं आँसू, दिन-छिन अति अकुलाहीं।
काहू सौं मिलिवौ न सुहावै, बातन सौं घबराहीं ।॥
बस्ती छोड़ि एकान्त बैठिवौ, जग सब शून्य दिखाहीं
'भोरी' ऐसे दुख बिनु प्यारी, जीवन जन्म वृथा ही।
भोरी सखी के पद
(३०८)
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भाग 1
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ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
जैसा सुख दशरथ ने पायो, जैसा सुख दशरथ हैं पायो।
राम दरश किए बिनु, राम दरश किए बिनु,
कोऊ सुहावै नाहीं ।॥
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
जैसा सुख कौशल्या ने पायो।, जैसा सुख कौशल्या ने पायो।
राम हिय बिनु लगाए, राम हिय बिनु लगाए,
दिन निकसत नाई ।॥
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
जैसा सुख लक्ष्मन ने पायो।, जैसा सुख लक्ष्मन ने पायो।
राम सेवा किए बिनु राम सेवा, राम सेवा किए बिनु
चैन परत नाई ।॥
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
जैसा सुख जनकजी ने पायो।, जैसा सुख जनकजी ने पायो।
स्वयंवर में जनकपुरी के, स्वयंवर में जनकपुरी के,
जब राम भये जवांई ।॥
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
जैसा सुख सीता ने पायो।, जैसा सुख सीता ने पायो।
एक ही स्वयंवर में जब, एक ही स्वयंवर में जब,
गई चारों बहने ब्याहीं
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
जैसा सुख अयोध्या ने पायो।, जैसा सुख अयोध्या ने पायो।
चार चार बहुओं के आने पर, चार चार बहुओं के आने पर,
जब दुल्हन सी गई सजाई
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
जैसा सुख अयोध्यावासियों ने पायो।, जैसा सुख अयोध्यावासियों ने पायो।
जब चारों कुंवर संग देखी, जब चारों कुंवर संग देखी,
चार राजकुमारियां आईं।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
वैसा ही सुख जितेन्द्र मांगे, वैसा ही सुख जितेन्द्र मांगे
क्षणभंगुर नहीं चिरकालिक हो, क्षणभंगुर नहीं चिरकालिक हो,
सेवा चरणों कीऽ रघुराई ।
वैसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
ऐसौ सुख दीजै रघुराई ।
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भाग 2
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ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
जैसी कृपा करी देवकी पर, जैसी कृपा करी देवकी पर।
कैसी कृपा
जगत खेले जिनकी गोद में, जगत खेले जिनकी गोद में ।
वो उनको गोद खिलाई।
प्रभु जी
वो तुमको गोद खिलाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
जैसी कृपा करी गोपिन पर, जैसी कृपा करी गोपिन पर।
कैसी कृपा
गौलोक के महाराजा को, गौलोक के महाराजा को।
खिलाएं दही, दूध, मलाई।
प्रभु जी
वो तुमको अपने हाथ पवाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
जैसी कृपा द्रौपदी पर कीन्हीं, जैसी कृपा द्रौपदी पर कीन्हीं।
कैसी कृपा
घिरी सभा में जब वह इकली, घिरी सभा में जब वह इकली। दौड़कर लाज बचाई।
जब उसने कृपा तुम्हारी ।
प्रभु जी
तुमने लाज बचाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
जैसी कृपा करी पांडवन पर, जैसी कृपा करी पांडवन पर।
कैसी कृपा
महाभारत दीनी जिताई, उनको महाभारत दीनी जिताई।
तुम्हारी कृपा से राजगद्दी पाई।
प्रभु जी
तुमने राजगद्दी दिलाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
जैसी कृपा करी उत्तरा पर, जैसी कृपा करी उत्तरा पर।
कैसी कृपा
अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से, अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से,।
उसकी कोख बचाई।
प्रभु जी
कौख में जाकर तुमने परीक्षित की जान बचाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
जैसी कृपा करी सुदामा पर, जैसी कृपा करी सुदामा पर।
कैसी कृपा
तीन मुट्ठी तंदुल खाकर, उसके तीन मुट्ठी तंदुल खाकर,
दे दी तीन लोकों की ठकुराई।
प्रभु जी
उसको पता भी लगन न पाई।
ऐसौ कृपा कर दो कन्हाई।
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भाग 3
भोरी सखी का विरह
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ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
बिनु पद-कंज छटा दृग देखे, बिनु पद-कंज छटा दृग देखे,
कोऊ सुहावै नाहीं , कोऊ सुहावै नाहीं ।॥
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
नाम रटै दृग ढारैं आँसू, नाम रटै दृग ढारैं आँसू,
दिन-छिन अति अकुलाहीं, दिन-छिन अति अकुलाहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
काहू सौं मिलिवौ न सुहावै, काहू सौं मिलिवौ न सुहावै,
बातन सौं घबराहीं, बातन सौं घबराहीं ।॥
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
बस्ती छोड़ि एकान्त बैठिवौ, बस्ती छोड़ि एकान्त बैठिवौ,
जग सब शून्य दिखाहीं, जग सब शून्य दिखाहीं
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
प्यारी
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
'भोरी' ऐसे दुख बिनु प्यारी, 'भोरी' ऐसे दुख बिनु प्यारी
जीवन जन्म वृथा ही, जीवन जन्म वृथा ही।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
राधा
ऐसौ दुख दीजै हिय माहीं।
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