आज इतने करीब आओ
मैं तुम में समा जाऊँ
तुम मुझ में समा जाओ
सांसों की हरारत से तनहाई पिघल जाए
जलते हुए होंठों का अरमान निकल जाए
चाहत की घटा बन कर यूँ मुझपे बरस जाओ
मैं तुम में समा जाऊँ
तुम मुझ में समा जाओ
ये बात न थी अबसे पहले कभी जीने में
दिल बन के धड़कते हो तुम्हीं मेरे सीने में
कभी साथ न छोड़ोगे तुम मेरी कसम खाओ
मैं तुम में समा जाऊँ
तुम मुझ में समा जाओ
दूरी ना रहे कोई
आज इतने करीब आओ
मैं तुम में समा जाऊँ
तुम मुझ में समा जाओ
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