Thursday, September 28, 2023

भजन –> बड़ी दूर से चलकर आया हूं मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए

बड़ी दूर से चलकर आया हूं मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए ।
मेरे भोले तेरे दर्शन के लिए
 
एक बेल पत्र में लाया हूं चरणों में तेरे अर्पण करने 
बड़ी दूर से चलकर आया हूं मेरे भोले तेरे दर्शन के लिए

ना हीरे मोती सोना है ना धन दौलत की झोली है
दो आंसू बचा कर लाया हूं पूजा तेरी करने के लिए बड़ी

 दूर से चलकर आया हूं मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए 
एक बेल पत्र में लाया हूं चरणों में तेरे अर्पण करने

मेरे बाबा  मेरी इच्छा नहीं अब यहां से वापस जाने की 
चरणों में जगह दे दो थोड़ी मुझे जीवन भर रहने के लिए

बड़ी दूर से चलकर आया हूं बाबा तेरे दर्शन के लिए
मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए

एक बेलपत्र मै लाया हूं चरणों में तेरे अर्पण के लिए 
मेरे भोले तेरे दर्शन के लिए 

Tuesday, September 19, 2023

हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं ।

हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं । 

हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं, ये दुनिया वाले जलते हैं
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं

बाबा ने हमको चलना सिखाया 
सब भक्तों से मिलना सिखाया 
हम तो सीना तान के चलते हैं
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं, ये दुनिया वाले जलते हैं
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं 

बाबा हमारा साथी कहाए
बन के सहारा नाती कहाए
हम तो इनके भरोसे पलते हैं
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं, ये दुनिया वाले जलते हैं
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं 

दुनिया वाले क्या पहचाने
बाबा हमारे दिल की जाने
इनके नाम से संकट टलते हैं
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं, ये दुनिया वाले जलते हैं
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं 


दास भोले भजन सुनाए 
बाबा ये तेरी कृपा चाहे 
इनके नाम के दीपक जलते हैं
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं

हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं, ये दुनिया वाले जलते हैं
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं 

हरि ओम में ओम समाया है मेरा भोला नगर में आया है।

हरि ओम में ओम समाया है  मेरा भोला नगर में आया है।

मेरे भोले के माथे पर चंदा है।
डमचंदारू में ओम समाया है मेरा भोला नगर में आया है।

मेरे भोले के माथे पे गंगा है
गंगा में ओम समाया है मेरा भोला नगर में आया है।

मेरे भोले के हाथों में डमरू है 
डमरू में ओम समाया है मेरा भोला नगर में आया है।

Sunday, September 17, 2023

बड़ी सुन्दर है माँ तेरी नगरी, भोले पैदल चले आ रहे है…

बड़ी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है…

उनकी जटा में गंगा विराजे,
गंगा बहाते चले आ रहे है,
उनके माथे पे चंदा विराजे,
वो चमकाते चले आ रहे है,
कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है…

उनके कानो में बिच्छु विराजे,
वो लटकाते चले आ रहे है,
उनके गले में नाग विराजे,
वो लहराते चले आ रहे है,
कितनी सुन्दर है माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है…

उनके हाथो में डमरू विराजे ,
वो बजाते चले आ रहे है,
उनके अंगो में बाघम्बर छाला,
वो पहन कर चले आ रहे है,
कितनी सुन्दर है, माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है…

उनके पैरो में घुघरू विराजे,
वो बजाते चले आ रहे है,
उनके संग में गौर मैया सोहे,
जोड़ी बना कर चले आ रहे है,
कितनी सुन्दर है, माँ तेरी नगरी,
भोले पैदल चले आ रहे है…

उनके चरणों में नंदी विराजे,

वो घुमाते चले आ रहे है,

कितनी सुन्दर, है माँ तेरी नगरी,

भोले पैदल चले आ रहे है…


काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी

काशी वाले से मिलना बड़ा  जरुरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा  जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी

जो मैं होती पवन बसंती, तो झोंका बनकर आती ।
जो मैं होती बेला चमेली चरणों में बिछ जाती 
बन ना सकी मैं हवा का झोंका 
ये मेरी मजबूरी

काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी

जो मैं होती काली बदरिया, छम छम नीर बहाती ।
गरज गरज के बरस बरस के, तुमको नित नहलाती ।
बन ना सकी मैं काली बदरिया
ये मेरी मजबूरी

काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी

जो मैं तेरा पता जानती, खत लिखती भिजवाती ।
सब राशिको को संग में लेकर, तुमसे मिलने आती ।
पता तेरा मेरे पास नहीं है 
ये मेरी मजबूरी

Friday, September 15, 2023

यहां सबको है अपनी पड़ी कथा सुन ले घड़ी दो घड़ी ।

यहां सबको है अपनी पड़ी, कथा सुन ले घड़ी दो घड़ी ।
जिंदगी की ना टूटे लड़ी, भजन करले घड़ी दो घड़ी ।

इन आंखों का होना भी क्या? कभी दर्शन किया ही नहीं ।

इन कानों का होना भी क्या, कभी सत्संग सुना ही नहीं।

सत्संग से मिले घड़ी दो घड़ी। 

इन हाथों का मिलना भी क्या ? कभी दान किया ही नहीं ।

Tuesday, September 12, 2023

भजन –भोले बाबा ने ऐसा, बजाया डमरू सारा कैलाश मग्न हो गया…

भोले बाबा ने ऐसा, बजाया डमरू बजाया डमरू

सारा कैलाश पर्वत मग्न हो गया…

डमरू की धुन सुनके ब्रह्मा चले,
यहां ब्रह्मा चले वहां विष्णु चले,
वहां लक्ष्मी का मन भी मग्न हो गया,
सारा कैलाश पर्वत मग्न हो गया…

डमरू की धुन सुनके गंगा चले,
गंगा चले वहां यमुना चले,
वहां सरयू का मन भी मग्न हो गया,
सारा कैलाश पर्वत मग्न हो गया…

डमरू की धुन सुनके सूरज चले
यहां सूरज चले वहां चंदा चले
वहां तारों का मन भी मग्न हो गया,
सारा कैलाश परबत मग्न हो गया…

डमरू की धुन सुनके कान्हा चले,
यहां कान्हा चले वहां राधा भी चले,
वहां सखिओं का मन भी मग्न हो गया,
सारा कैलाश परबत मग्न हो गया…

सुन डमरू की आवाज़ गणपत चले,
यहां गणपत चले वहां कार्तिक चले,
वहां अम्बे का मन भी मग्न हो गया,
सारा कैलाश परबत मग्न हो गया…

यहां राम चले वहां सीता चले 

लक्ष्मण का मन भी मग्न हो गया,

भोले बाबा ने ऐसा बजाया डमरू,
सारा कैलाश परबत मग्न हो गया…

Saturday, September 9, 2023

भर दिया भण्डार काशी वाले ने लिरिक्स

भर दिया भण्डार काशी वाले ने लिरिक्स

लुटा दिया हां लुटा दिया
लुटा दिया हां लुटा दिया
लुटा दिया हां लुटा दिया
लुटा दिया हां लुटा दिया

अरे लुटा दिया भण्डार काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने । हो ।
अरे लुटा दिया भण्डार काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने

जो जैसी भावना लाया, वो वैसा ही फल पाया 
जो जैसी भावना लाया, वो वैसा ही फल पाया 
नहीं खाली उसे लौठाया, वो मन ही मन हरषाया 
नहीं खाली उसे लौठाया, वो मन ही मन हरषाया 

कर दिया उसे निहाल काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने
कर दिया उसे निहाल काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने

कर दिया मालामाल काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने

अरे लुटा दिया भण्डार काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने । हो ।

अरे लुटा दिया भण्डार काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने

जो लगन लगाया सच्ची, है उसकी नाव ना अटकी ।
जो लगन लगाया सच्ची, है उसकी नाव ना अटकी ।

बेड़ो को पार लगाया,  नहीं देर करी पल भर की |
बेड़ो को पार लगाया, नहीं देर करी पल भर की |

मिटा दिया जंजाल काशी वाले ने, 
कर दिया मालामाल काशी वाले ने
मिटा दिया जंजाल काशी वाले ने, 
कर दिया मालामाल काशी वाले ने

ओ कर दिया मालामाल काशी वाले ने
ओ कर दिया मालामाल काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने

चरणों की किया जो सेवा, वो पाया मिश्री मेवा |
चरणों की किया जो सेवा, वो पाया मिश्री मेवा |
चरणों की किया जो सेवा, वो पाया मिश्री मेवा |
चरणों की किया जो सेवा, वो पाया मिश्री मेवा |

जिसने है मांगा बेटा, वो चाँद सा टुकड़ा पाया |
जिसने है मांगा बेटा, वो चाँद सा टुकड़ा पाया |
कर दिया फिर खुशहाल काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने
कर दिया सब को निहाल काशी वाले ने
भर दिया भण्डार काशी वाले ने

अरे लुटा दिया भण्डार काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने । हो ।
अरे लुटा दिया भण्डार काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने



भर दिया भण्डार काशी वाले ने लिरिक्स

भर दिया भण्डार काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने

जैसी जो भावना लाया, 
वैसा ही वो फल पाया 
नहीं खाली उसे लौठाया, 
वो मन ही मन हरषाया 
कर दिया मालामाल काशी वाले ने
भर दिया भण्डार काशी वाले ने

जो लगन लगाया सच्ची है 
तो उसकी नाव ना अटकी 
नैया को पार लगाया, 
नहीं देर करी वो पल की |
मिटा दिया जंजाल काशी वाले ने
भर दिया भण्डार काशी वाले ने

जिसने श्रृंगार सजाया, 
बाबा का दर्शन पाया 
जिसने मांगा है बेटा, 
वो चाँद सा टुकड़ा पाया |
कर दिया मालामाल काशी वाले ने
भर दिया भण्डार काशी वाले ने

चरणों की किया जो सेवा, 
वो पाया मिश्री मेवा |
वो मन ही मन हर्षाया, 
नैनों में रूप समाया |
कर दिया सब को निहाल काशी वाले ने
भर दिया भण्डार काशी वाले ने

Saturday, September 2, 2023

इक झोली मे फूल भरे है,इक झोली में कांटे,

इक झोली मे फूल भरे है,
इक झोली में कांटे,
कोई कारण होगा,
अरे कोई कारण होगा,
तेरे बस में कुछ भी नही,
ये तो बाँटने वाला बांटे रे
कोई कारण होगा,
अरे कोई कारण होगा।।

पहले बनती है तकदीरे,
फिर बनते है शरीर,
कोई राजा कोई भिखारी,
कोई संत फ़क़ीर,
कोई कारण होगा,
अरे कोई कारण होगा।।

तन को बिस्तर मिल जाये,
पर नींद को तरसे नैन
कांटो पर सोकर भी किसी के,
मन को आये चैन,
कोई कारण होगा,
अरे कोई कारण होगा।।

मंदिर-मस्जिद मैं जाकर भी,
मिलता नही है ज्ञान,
कभी मिले मिट्टी से मोती,
पत्थर से भगवान,
कोई कारण होगा,
अरे कोई कारण होगा।।

सागर से भी बुझ ना पाए,
कभी किसी की प्यास,
कभी एक ही बून्द से हो जा,
जाती है पूरण आस,
कोई कारण होगा,
अरे कोई कारण होगा।।

इक झोली मे फूल भरे है,
इक झोली में कांटे,
कोई कारण होगा,
अरे कोई कारण होगा,
तेरे बस में कुछ भी नही,
ये तो बाँटने वाला बांटे रे
कोई कारण होगा,
अरे कोई कारण होगा।।

कामाख्या कलश

कलश में आज लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल मैं अपने प्यार की गांठ को दिखाया।
22 अगस्त 2023

डॉक्टर में एफएनएसी जांच के लिए लिखा
24 अगस्त 2023 को FNAC जांच की डेट ली जो
25 August 2023 की मिली।

8 दिन बाद आज है गणेश की रिपोर्ट मिली और डॉक्टर को दिखाया तो उसने कहा कि अभी छोटी है हम बड़ी होने का इंतजार करो तब निकलेगी अन्यथा यह दोबारा हो जाएगी।
FNAC की किसी की रिपोर्ट यह है।

*गंगा स्नान हरिद्वार के सेवा शुल्क में ₹100 की छूट*  🚩 *श्री गणेशायः नमः* 🚩 🌹 *कार्तिक* मास में *हरिद्वार* में पवित्र *गंगा स्नान* जाने क...