यहां सबको है अपनी पड़ी, कथा सुन ले घड़ी दो घड़ी ।
जिंदगी की ना टूटे लड़ी, भजन करले घड़ी दो घड़ी ।
इन आंखों का होना भी क्या? कभी दर्शन किया ही नहीं ।
इन कानों का होना भी क्या, कभी सत्संग सुना ही नहीं।
सत्संग से मिले घड़ी दो घड़ी।
इन हाथों का मिलना भी क्या ? कभी दान किया ही नहीं ।
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