Saturday, March 29, 2025

मेरा मन पंछी ये बोले उड़ वृन्दावन जाऊँ

मेरा मन पंछी ये बोले उड़ वृन्दावन जाऊँ
मेरा मन पंछी ये बोले उड़ वृन्दावन जाऊँ

मेरा मन पंछी ये बोले उड़ वृन्दावन जाऊँ
ब्रज की लता पता में मै राधे राधे गाऊं।।

मै राधे राधे गाऊं, मै श्यामा श्यामा गाऊं
मेरा मन पंछी ये बोले।।

वृन्दावन की महिमा प्यारे कोई ना जाने
प्रेम नगरिया मन मोहन की प्रेमी पहचाने।।

ब्रज गलियों में झूम झूम के
ब्रज गलियों में झूम झूम के, मन की तपन बुझाऊं।।

ब्रज की लता पता में मै राधे राधे गाऊं
मै राधे राधे गाऊं, मै श्यामा श्यामा गाऊं।।
मेरा मन पंछी ये बोले।।

निधि वनजी में जहाँ कन्हैया रास रचाते है
प्रेम भरी अपनी बांसुरिया आप बजाते है।।


राधा संग नाचे सांवरिया
राधा संग नाचे सांवरिया दर्शन करके आऊ।।

ब्रज की लता पता में मै राधे राधे गाऊं
मै राधे राधे गाऊं, मै श्यामा श्यामा गाऊं
मेरा मन पंछी ये बोले।।

छैल छबीले कृष्ण पिया तेरी याद सताती है
कुहु कुहु कर काली कोयल मन तडपाती है।।

छीन लिया सब तूने मेरा
छीन लिया सब तूने मेरा, यार कहा अब जाऊँ

ब्रज की लता पता में मै राधे राधे गाऊं
मै राधे राधे गाऊं, मै श्यामा श्यामा गाऊं
मेरा मन पंछी ये बोले

राधे राधे जपले मनवा दुःख मिट जायेंगे
राधा राधा सुनके कान्हा दौड़े आएंगे

प्यारे राधा रमण तुम्हारे
प्यारे राधा रमण तुम्हारे चरणों में रम जाऊँ।।

ब्रज की लता पता में मै राधे राधे गाऊं
मै राधे राधे गाऊं, मै श्यामा श्यामा गाऊं
मेरा मन पंछी ये बोले।।

मेरा मन पंछी ये बोले उड़ वृन्दावन जाऊँ
ब्रज की लता पता में मै राधे राधे गाऊं
मै राधे राधे गाऊं, मै श्यामा श्यामा गाऊं
मेरा मन पंछी ये बोले।।

Wednesday, March 19, 2025

श्री श्याम जी की आरती; वंदना व स्तुति

श्री श्याम जी की आरती

ऊँ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे । 
खाटूधाम विराजत, अनुपम रूप धरे ।। 
ऊँ जय 
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चवंर दुरे । 
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े ।। 
ऊँ जय 
गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे । 
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले ।। 
ऊँ जय 
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे । 
सेवक भोग लगावात, सेवा नित्य करें ।। 
ऊँ जय 
झांझ कटोर और घड़ियाल, शंख मृदंग धुरै । 
भक्त आरती गावें, जय जयकार करें ।। 
ऊँ जय 
जो ध्यावै फल पावे, सब दुःख से उबरे । 
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे ।। 
ऊँ जय 
श्री श्याम बिहारी जी की आरती जो कोइ नर गावे । 
कहत आलू सिंह स्वामी, मनवांछित फल पावे ।। 
ऊँ जय
श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे ।। ऊँ जय

श्री श्याम जी की वन्दना

खाटू वाले श्याम बिहारी कलिकाल में तेरी महिमा है न्यारी । 
हारे हुओं का तुम हो सहारा, कहलाए जग में प्रभु कष्टहारी ।। 
मैं भी शरण में तुम्हारी पड़ा हूँ तारो न तारो है मर्जी तुम्हारी । 
मेरे हृदय का अरमान है ये निगाहो में बस जाए सूरत तुम्हारी ।। आठों प्रहर मैं तुम्हे ही निहारूँ बाते करूँ तो करूँ तुम्हारी । 
हमें प्रीत तुमसे हुई श्याम प्यारे, तुम्हे प्रीत भायी तो होगी हमारी ।। 
माया में लिपटे हुए जीव हैं हम, दया की नजर हम पे करना मुरारी । 
जब भी जनम लूं बनूं दास तेरा, सेवा में अपनी लगाना बिहारी ।। 
नन्दू हृदय में कुंज गूजे, श्री राधे.... श्री राधे ...श्री राधे प्यारी ।


श्री श्याम स्तुति

हाथ जोड़ विनती करूँ, सुनियो चित्त लगाये ।
दास आ गयो शरण में, रखियो म्हारी लाज ।।
धन्य ढुंढारों देश है, खाटू नगर सुजान ।
अनुपम छवि श्री श्याम की, दर्शन से कल्याण ।।
श्याम-श्याम तो मैं रहूँ, श्याम है जीवन प्राण ।
श्याम भक्त जग में बड़े, उनको करूँ प्रणाम ।।
खाटू नगर के बीच में, बण्यो आपको धाम।
फागुन शुक्ल मेला भरे, जय-जय बाबा श्याम ।।
फागुन शुक्ल-द्वादशी, उत्सव भारी होय ।
बाबा के दरबार से, खाली जाय न कोय ।।
उमापति, लक्ष्मीपति, सीतापति श्रीराम
लज्जा सबकी राखियो, खाटू के बाबा श्याम ।।
पान सुपारी इलायची, अतर सुगन्ध भरपूर ।
सब भक्तन की विनती, दर्शन देवो हजूर ।।
आलू सिंह तो प्रेम से, धरे श्याम को ध्यान ।
श्याम भक्त पावें, सदा श्याम कृपा से मान ।।

श्री खाटू श्याम जी की जय 
तीन बाणधारी की जय
नीले के सवार की जय

Rs 1 lat Polit


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