Sunday, September 17, 2023

काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी

काशी वाले से मिलना बड़ा  जरुरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा  जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी

जो मैं होती पवन बसंती, तो झोंका बनकर आती ।
जो मैं होती बेला चमेली चरणों में बिछ जाती 
बन ना सकी मैं हवा का झोंका 
ये मेरी मजबूरी

काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी

जो मैं होती काली बदरिया, छम छम नीर बहाती ।
गरज गरज के बरस बरस के, तुमको नित नहलाती ।
बन ना सकी मैं काली बदरिया
ये मेरी मजबूरी

काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी

जो मैं तेरा पता जानती, खत लिखती भिजवाती ।
सब राशिको को संग में लेकर, तुमसे मिलने आती ।
पता तेरा मेरे पास नहीं है 
ये मेरी मजबूरी

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