काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
जो मैं होती पवन बसंती, तो झोंका बनकर आती ।
जो मैं होती बेला चमेली चरणों में बिछ जाती
बन ना सकी मैं हवा का झोंका
ये मेरी मजबूरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
जो मैं होती काली बदरिया, छम छम नीर बहाती ।
गरज गरज के बरस बरस के, तुमको नित नहलाती ।
बन ना सकी मैं काली बदरिया
ये मेरी मजबूरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
काशी वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
ओ डमरू वाले से मिलना बड़ा जरुरी
जो मैं तेरा पता जानती, खत लिखती भिजवाती ।
सब राशिको को संग में लेकर, तुमसे मिलने आती ।
पता तेरा मेरे पास नहीं है
ये मेरी मजबूरी
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