Tuesday, August 26, 2025

केले की सगाई'

केले की सगाई' की सांगोपांग कल्पना गीन ऐसा ही है-

केले की भई ऐ सगाई सकलकन्दी नाचन आई 
"कासीफल के बने नगाड़े भिण्डी की चोब बनाई 
गोभी फूल के गड़े सिमाने, मूरी के खम्भ लगाए । 
गाजर बिचारी कें लाल भए ऐं आलू ओछक लाए । 
गाँड़े बिचारे नें भेली बाँधी, गेहूँ के गूंजे भराए । 
बेर बुरकली के भाँड़ बराती, मूंगफली रंडी बनाई । 
मक्का बिचारी के साल दुसाले, ज्वार लडुए बँधाए । 
चार बाजरे के डोम मीरासी, नटिनी नाचन आई ।

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