केले की सगाई' की सांगोपांग कल्पना गीन ऐसा ही है-
केले की भई ऐ सगाई सकलकन्दी नाचन आई
"कासीफल के बने नगाड़े भिण्डी की चोब बनाई
गोभी फूल के गड़े सिमाने, मूरी के खम्भ लगाए ।
गाजर बिचारी कें लाल भए ऐं आलू ओछक लाए ।
गाँड़े बिचारे नें भेली बाँधी, गेहूँ के गूंजे भराए ।
बेर बुरकली के भाँड़ बराती, मूंगफली रंडी बनाई ।
मक्का बिचारी के साल दुसाले, ज्वार लडुए बँधाए ।
चार बाजरे के डोम मीरासी, नटिनी नाचन आई ।
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