मै आ तो गया हूँ मगर जानता हूँ
तेरे दर पे आने के काबिल नहीं हूँ
मै आ तो गया हूँ मगर जानता हूँ
तेरे दर पे आने के काबिल नहीं हूँ
तेरी महरबानी का हैं बोझ इतना
कि सर भी उठाने के काबिल नहीं हूँ
मै आ तो गया हूँ मगर जानता हूँ
तेरे दर पे आने के काबिल नहीं हूँ
तेरी महरबानी का हैं बोझ इतना
कि सर भी उठाने के काबिल नहीं हूँ
झोली फैलाऊं कैसे तेरे दर पे आके
जो पहले दिया हैं वही कम नहीं हैं
मैं ज्यादा उठाने के काबिल नहीं हूँ
तेरी महरबानी का हैं बोझ इतना
जिसे मैं उठाने के काबिल नहीं हूँ
मै आ तो गया हूँ मगर जानता हूँ
ज़माने की चाहत में खुद को भुलाया
ऋषियों ने संतों ने कितना समझाया
गुनाहगार हूँ मै सजावार तेरा
तेरी महरबानी का हैं बोझ इतना
तुम्हें मुहँ दिखाने के काबिल नहीं हूँ
मै आ तो गया हूँ मगर जानता हूँ
तेरे दर पे आने के काबिल नहीं हूँ
तेरी महरबानी का हैं बोझ इतना
तमन्ना यही है कि सर को झुका लूं
तेरा दीद एक बार जी भर के पालूं
शिवा दिल के टुकड़े के मेरे ओ बाबा
तेरी महरबानी का हैं बोझ इतना
कुछ भी चढ़ने के काबिल नहीं हूँ
मै आ तो गया हूँ मगर जानता हूँ
तेरे दर पे आने के काबिल नहीं हूँ
तेरी महरबानी का हैं बोझ इतना
सर भी उठाने के काबिल नहीं हूँ
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