Sunday, March 28, 2021

वसंत

जब पलाश वन में दहके, 
कोमल शीतल अंगारे।
निशा टाँकती, 
सेमल के अंगों पर लाल सितारे।
शाम सिन्दूरी याद दिलाती 
शाकुन्तल - दुष्यंत की।
मन के द्वारे पर हौले से, 
तब दस्तक हुई वसंत की।

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