जब पलाश वन में दहके,
कोमल शीतल अंगारे।
निशा टाँकती,
सेमल के अंगों पर लाल सितारे।
शाम सिन्दूरी याद दिलाती
शाकुन्तल - दुष्यंत की।
मन के द्वारे पर हौले से,
तब दस्तक हुई वसंत की।
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