(339) Kalyug Ka Avtar Mera Lakh Data(Yatra Shri Khaatu Shyam) - Mahesh Prabhakar @TSeriesBhaktiSagar - YouTube
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Transcript:
(00:00) और [संगीत] सुंदर सजा दरबार खाटू श्याम भक्तों लंका बावजूद दुनिया में श्याम नाम था भक्तों तमिल [संगीत] धाम चल रे चल चल चल चल अब [संगीत] हम यहां तेरा कहते हैं धातु धमकी भक्तों जय बोल बोल के शुरू करेंगे शाम की भक्तों कहलाते हैं जिनकी बंधना सुर नर मुनीजन सृष्ट है कलियुग में श्याम नाम था बुने थे में वृध्दि हुई तकदीर संवर थी है झूमते होती सुबह शुरू यहां पर श्याम नाम से जग में
(01:07) हैव जिशान खाटू श्याम की भक्तों जय गुरु जी के यहां पे श्याम नाम की भक्तों मिलती नहीं जग में कहीं यह तीनों साले है पापा तो तेल मिठाई लिए यहां पर कमाल है आमतौर पर हम यात्रा श्री श्याम नाम ले भले करेंगे श्याम जी कहां तक हम लेंगे इन थे डीजल का दाम चलें ना चलें आओ [संगीत] कि पिछले सप्ताह हर लेजर शाम नाम है साफ बड़ी कुछ ऐसा वार शाम हम है वहां आप श्याम श्याम श्याम श्याम श्याम उन हम आपको चल खाटू धाम राम
(02:14) धाम श्री शैतान शैलो शाम है मेरे पूर्ण करेंगे शाम कि हर काम को तेरे एहसास दयाल धुंध जग में और नहीं है अहिलवती के जाल ध्यान न कहीं है अब तो तिलावत कि है पथभ्रष्ट श्याम जी देते हैं तथा लखदातार की जय श्याम जी प्रणाम कल धो लें हुआ था इसलिए तल्ख प्रॉब्लम [संगीत] पावणा नंबर टू जहां पर हम है पावर इन थे जब श्याम श्याम श्याम श्याम नाम है पावन
(03:20) अधिकारियों के खिलाफ एक अमरुद देश में जहां एक गांव था तू थाम चुके हैं नाम से वहां अहिलवती के लाल का दरबार है यहां सुंदरता चिलक शाम सरकार है यहां हरे क सहारे न कर देते हैं शाम दी और फल सकता खाटू मेज़र श्याम जी एक [संगीत] अध्यक्षा मुझे के ज्यादातर पार राधे आइज अरे वाणियां गया प्रॉब्लम लिया गया धुंध बिल्कुल उन [संगीत] अधीन [संगीत] पड़ते मजा नारियल निशान यहां पर है शाम की
(04:31) अधिकतम राशि अनुसार यहां पर बैठा हूं जैसे सेट कर पार लगा के बैठा हूं मैं रक्षा मुद्दा रहेगा व्याख्या [संगीत] झांकी सजी शाम की नजर नहीं पड़ती जितना भी देखता हूं काम अय करती मस्से कथानुसार शमशान तक की सूरत मन वाकई मृतक शाम शांति मूरत विश्वास लेकर मन में श्याम जी के द्वारा जग जाएगी तो युद्ध तप्त किया हुआ था चल ध्यान अधिक [संगीत] [संगीत] खोज साधु राम जग में दूसरा नहीं तरह
(05:44) बादशाह मुकेश गौतम ना कहीं होकर हम यहां रख युक्त धर्म की जय बोल खेल शुरू करेंगे कि उन्हें मुखिया जयपुर बीकानेर राज मार्ग सीरवी श्याम जी के झूम पर जाति वह बच रींगस के लिए रेल मार्ग इसी रहे उत्तम होती है रेलगाड़ियों की यात्रा सुगम रींगस से 18 किलोमीटर प्रथम है मेरे बाबा श्याम रहते हैं वह खा टुब है धनखड़ टू दावणगिरी गांव की भूमि श्री श्याम ने अपने लिए जगह यही चुन्नीलाल धाकड यहां चलें ना चलें आओ [संगीत]
(06:56) कि हर माह में अति शोभ कुंवर थी इस दोस्त था तू थाम में रहता है पड़ा रस लगाते हैं यह मेले पर हर साल में है तो आओ चलें श्री श्याम के दर्शन का लाभ उस कार्तिक सुदी एकादशी लौंग गई पावन श्यामचंद देख हर्षित हुआ है मन मधुमह और शक्तिपत कि है कश्मीर मेला लगे ऐसा न जाए भ्रमि [संगीत] ताड़ते जाते हैं भक्त दूर-दूर से गुजरात महाराष्ट्र कोई कानपुर स्थिति में रहना पिंपल देखा तुझको निकलने फाइन थे झंझाल
(08:04) [संगीत] बंगाल कोलकाता पहुंची तथा हमसे हरियाणवी भैया आते हैं भ्रम पर साउथ दिल्ली स्थित कि बेंगलूर से हम पर जाते हैं वक्त दूर दूर से ही मैं मरू प्रदेश के पत्ते चन चन श्याम जी हर पल पता रहते हैं इन यह मनु श्याम जी और तो कि हर घड़ी लगी रहती थी कतार है सब कुछ भला लगता है वह झाड़ू का द्वार है साफ मन में कामना जल्द दिया गया समझो बांझपन मच मंगा सपा गया हुआ
(09:10) था चांद चांद चांद [संगीत] से सुनो लिए हम बता रहे हैं हम उनकी करो अदनान सुना रहे जो हम दुर्भावना उस आफ विच तन रहे विमल मन में अपार सफलता विष्णु महेश भट्ट अल्लाह [संगीत] यात्रा से पूर्व श्याम झा धरो पापा 3034 लेकर पूजा-अर्चना करो निशान पापा पता चले कि चाहे तुम निशान की पूजा के नियम कह रहे हैं हम निशान की पूजा जॉब विधान है सुनो पहले
(10:19) स्नान करके शेयर निशान हुं अपनी धुंधली-धुंधली चलता है आधे [संगीत] घंटे मजाल के निशान लिखो सजाइए मोर पंख फूल माला तो लगाए हैं शीर्षक चांदी का छत्र ऐसा पान तो फिर श्याम श्याम श्याम श्याम श्याम ने यह सर या कंधों और दुपट्टा गले में हो जला पर धूप जी पापा जी की ज्योतिंद्र चौधरी अनुसार प्रसाद तुम करो तस्वीर सांवरे कुंवारे
(11:27) समझ-बूझ करो भजन करो जाए खैर लगाओ अली करेंगे पाल जी सो भी मना और मिश्री के साथ में ब्रेकअप साधो है वह उत्तम पूजा के पास कीजिए प्रसाद का वितरण नुक्शे दिल धुंधले [संगीत] चित्र निशान उर्स भक्तों भक्तों में वितरित किए कमर पर होनी अनिवार्य है एक तो तक निशान हम लोग डोरी संकल्प यात्रा
(12:32) subscribe करो सांवले तरह ओरिसा जान कब सुधरोगे जय शाम की जय शाम की कहते हुए चलो मार्ग मुचो बिन उजै शाम की कहुं अध्ययन में काले पत्थर हो आपके तन पे चमड़े की कोई वस्तु तरह न पाए वतन पे मेघवाल धारा [संगीत] 80 सवामण लगाइए निशान तो पापा के दरबार लाए अर्पण करो शाम के चरणों में यह निशान हुई है आप अच्छी तैयारी यार तेरा
(13:40) झाल हनुमान का भी जो निशान ताक़त मिलाए उसको भी हनुमान के चरणों में चढ़ाएं पूर्ण करेंगे काम न श्री श्याम बिहारी सब का भला करते हैं इन थे थारी मत और रेलमार्ग से चौंक भक्त ला रहे हैं उनको कुछ बात तो हम यहां बता रहे हैं हम नाम पिंपल धीरे चलता है [संगीत] आखिरी चिट्ठियों के भक्तों मन में नहीं मंद देख पाओगे भक्तों के ठहरने के लिए धर्मशाला में विश्राम कीजिए विश्राम के
(14:50) भक्त शामली ढूंढ [संगीत] भरी पड़ी है धर्मशाला खाटू धाम में मिल जाती है जगह पापा के नाम से खुला हुआ भंडार मेरे श्याम त्यौहार सजा हुआ तरवार मेरे सामने था यहां विश्राम के पश्चात करना चाहिए इतना कपड़े बदलकर साफ व स्वच्छ कि चीन अधीन धूल धूप में [संगीत] अपने [संगीत] अपने समान की सुझाव शाम कीजिए श्री श्याम श्याम श्याम श्याम श्याम कीजिए मंदिर के
(15:59) सामने तुम्हें प्रथा खत्म लेग का या प्रसाद अपने सत्य अनुसार मिलेगा का यह व्रत आदि लेकर छात्रों ने पंगत में खड़े हो अब दोस्तों पहले के साथ में संगत ने खड़े हो सुंदर सजा दरबार सामने है शाम झाला मुरली मनोहर सांवरिया गिरधारी निकाल पंगत में खड़े होकर पीछे देखूंगा ना क्वीर अब शब्द या पुण्य मुख से कभी बोलना नहीं छोटा बड़ा जो भी मिले तपता सम्मान हो ना भेदभाव मन मगर इन थे जलधि [संगीत] पावन बड़ी घृत दूध मां भक्तों महिमा बड़ी
(17:17) है श्याम जी के नाम की भक्तों को दर्शन है तो आप वह रहेगी श्याम सुंदर छवि मलधारी आएगी है का प्रसाद चढ़ाकर कुं मन से कीजिए कामना पूर्ति का आशीर्वाद लीजिए प्राण अपने सर को झुका करके कीजिए ध्वजा प्रसाद नारियल चढ़ाते कीजिए [संगीत] आशीष पुजारी सफल रैली दिए भक्तों जप शाम चिकन नमक पिंपल तो आप तनावमुक्त [संगीत] [संगीत] हर कामना पूरी करें मेरे श्याम
(18:30) झोली तथा तप करेंगे अध्यक्ष श्याम जी धुंधता उन दक्षिणा मंदिर में दीजिए मंदिर कह दू योगिता अनुसार कीजिए [संगीत] कहते हैं जैसी भावना रहती है जाकर मन देखा है उस पर सांवरा बहते हैं दर्शन महिला पति के लाल मेरी भी अरज सुनो टॉप से निहितार्थों थोड़ा उलझन दो बना हुआ है श्याम कुंड भी यहां भक्तों इसको गूंदना यह क्वेश्चन मन सवाल ध् न् [संगीत] की
(19:39) महिमा है श्याम उन्नत किया धीर व भक्तों है बुध शाम चल धुंध भक्तों इस जल नहाने से कट जाती है व्याधा कहते हैं श्याम कुंड नियुक्त हकदार था [संगीत] भक्तों आदर्श बन सकता है उन्हें जिस जगह एग्जाम में रोज आते जो प्रजाति थी यहां पीते शाम को धो अंधार से निकला श्याम प्रभु की कृपा से वाले लेट जगह को जॉब मौत कि देखा सुनी चक्रवात तौर कहते हैं काया तमिलनाडु [संगीत] अंधाधुन [संगीत] अधूरे चलता चलता
(20:48) [संगीत] सुंदर नगर पालिका तू श्याम भक्त किचन का बजट दुनिया में श्याम नाम है [संगीत] और अधिक उम्र के श्री श्याम ने आवाज लगाए धीरे-धीरे करना मेरे आई खून आए जो खोद देखा तो एक सांवली सूरत सामने खड़ी थी बाबा श्याम की मूरत कि राजपूत है यहां तक उनका ख्वाब में दिखाया राजा तक कि शाम में आते
(21:56) सुनाया मंदिर यहां पर एक मेरा आशिक बनाओ मंदिर बनाकर मेरी लुटेरों ने तब से बन मंदिर यहां पर श्याम नाम का चर्चा हेतु सार्थक लिख चुके हम का कलियुग मुद्दे इन थे का धारी की राम राम कहां हो रहा है मेरा कृष्ण मुरारी ई एम इन थे झंझाल ध्यान अधिक अब स्किन थी एक कहानी करते हैं कि कल उठना देवता ध्यान उन पर मकान डिफिक भी मुकेश नुस्खा तु में उसके जैसा कोई भी महक ख्वाब
(23:09) उनका था युक्तियुक्त नाम था द टोटल कुछ जिसका हुआ विवाह अकरम खन क्वेश्चन अहिलवती भी काम धंधा का नाम शीघ्र भूनने के हुआ था भक्त जो रक्षा कम है इस पर वर्क का यह श्याम नाम किस तरह पड़ा कहते हैं शाम नमक की लाल सुनो यहां अंधाधुंध चलें आओ [संगीत] कि अवतार है यह कलयुग मिथुन थारी सुना रहे हैं इनकी जो लीला है प्यारे बचपन से ही थे जॉर्ज और गल्लां बार हा तक अस्त्रों और बेडकवर पूर्ण क्या
(24:22) त्रिपाठी भगवती की भोले बाबा साहेब प्रसन्न शंकर ने किए तीन इन थे और पंख शिव ने कहा यह पापड़ पिन लॉक तितले पल भर में दुश्मनों तक यह लार कि जिले में कि शिव का दिया वरदान खाली जान नहीं सकता फरवरी चुके जग में कोई हरा नहीं सकता खंगाल धुन अधिक संविदा मुद्दों के पीछे आई को आखिरी लेकर आया रण में सदियों द हेग ने संग्राम का ये दसों दिशाओं में गूंज उठी कि युवाओं को
(25:33) कि रणधीर व की आवाज बर्बरीक तक कई समर्थकों को देख लेने की क्षमता से कहीं माता ने कहा एक बच्चन मुझको लाल धो जो हारने लगे कल्याण में इस प्रख्यात दोष मैया पकने बच्चन चला धनुष टो था उनके आखिरी चरण बैक में का नुस्खे नाम है [संगीत] कि कश्मीर मुद्दे सवार होते तीर चलाकर पका लड़ा कबीर व्यतिरेक चला वेरिफिकेशन गौतम धूप खरबे मिसाल शांत
(26:39) सौम्य रूप देखूंगी रात हुए ताण नीले टेप को सभ चला ज्यादा हाथ अबीर झूठा हुआ सम्मान से चाहते हो कोई तीर नदी पहाड़ जंगलों फलांगता चला समाज हंसते भी चला वो पान दुकान चला क्षेत्रों तिथि तय हारियां भक्तों ने सीएम हर देख लें पारलौकिक शक्तियों खातिर की देखो जगह ताव न देखिअ भरि आज तक पर अच्छी तरह जहां मिलना है इसके जैसा इक पाल टीचर ने चदाणा चलेंगे चलेंगे भगवान तेरा भला कौन जो छुपके
(27:51) मायावती ने कल अधिकारी खातिर जान ली आते हुए पर रॉ को देखा जब कृष्ण ने ब्राह्मण का वेश धारित बेटा बैठे हुए दे दो है पीपल की छांव के तले भ्रमण करूं जो देखा हेयर गए कदम रूपा खेड़ा था कुछ सोचकर विशेषता मुट्ठी घोड़े से नीचे चाकू सा जार किया प्रणाम और बैठ गए जाणुं रामधन लखनऊ अनुसार कहां से आए हो किस ओर जा रहे हो किसी खुले जाए हो अंगना मुद्दा अहम जड़े रे ओ [संगीत] का नाम है परिवारिक मेरा आवश्यक है पांडू
(29:02) मैं जहां हूं देखिए बिल्कुल मे छिड़ा है धनु फॉलो हूं मैं भीम का पिस्ता घटोत्कच्छ ना बोलता हूं झूठ नहीं किया जा सकता हूं सच हुई एक घोड़ा समर महान है ऐसा मैंने सुना है जौहर दिखाने के लिए इस लड़की चुना है हर एक घूंघट का तुम मेरी मां ने कहां है कर लाए लाभकारी ना-नुकर है बोले मुद्दा कर्मों डिग्रीधारी ईएस लड़कियों में तेरे चीनी टुकड़े है सारी संघ ने चंद सांवरे सांवरे कि श्रवण उड़-उड़
(30:10) होंगे वहां पर जो तब से शुक्राणु के जैसे कि Bigg Boss हाथों खजूर है ऐसे जन्म भूमि के कारण जैसा शूरवीर है कॉल विद थर्राए उस गेड स्थिर है कि अश्वत्थामा दुर्योधन और विकरण तत्पर गणेश है लड़के के लिए हर लेखन ऐसे है वीर तुम बल्लभ जीत पाओगे गांव चारों वर्ण क्रम स्थित मुख्य आगे ब्राम्हण यतिन थिन लोक प्रचलित ले इश्क उन्हें सिधमुख सबके प्राण खींचने मुख संघ ने व् [संगीत]
(31:18) फोन नंबर [संगीत] यहां पर लौट कब को खुद दुकान ही मेरा तरकस में लौट आएगा फिर कौन अहम मेरा लक्ष्य है या कछुए ऐसा पान है मेरा दुश्मन को कार्तिक 212 ऐसा कौन है मेरा एक पल में संघार पतले हम मचा दे पछतावे के बिना सप्ताह व्रत कहां दे विफल है इसके या खडी तीर्थ अल्लाह बच पाएगा ना एक भी ऐसी है इसकी हां यह ब्राम्हण ने कहा व्यक्ति अहंकार है तेरा तुमने कहा उसके नायक पर है मेरा पढ़ते हुकूमत कि दे कुंठा उनके मुझको इतना विश्वास है तेरे झालू खेड़ा उन्नाव चल
(32:28) [संगीत] ध्यान अधिक पोलिथीन है नहीं यह एंग्री व्यक्ति तपता बदल प्रकोप है मेरे पति आराध्य देव खोल बाबा आखिरी है मां भगवती कशिश या फिर राधे है ब्रह्मण ने कहा आज कार्तिक प्रमाणित तो मुझे हर पत्त परीक्षाओं गेंद जैसे-जैसे पड़े वशीकरण भूमि चयन कल तुमको में नौ लूंगा कि वीरवार परिवारिक ने चढ़ा खंडवा प्राणी को छोड़ दिया याद कर भगवान को आखिरी दिन
(33:38) था दो [संगीत] में जुटा हुआ था वो तीर पत्ता-पत्ता तेंदूखेड़ा देने लगा परिक्रमा प्रारंभ अंक के चरणों पैदल रावण ने कहा तीर्थों पड़ाव मेरे पीछे शायद कोई पत्ता तबाह हो पांव के नीचे विनती है कि मानता हूं आप उठा ले ताकि मेरा यह थिरुचेंदुर लगा ले मेरा व दुश्वार पट्टे पर देने का है ना ख्वाब प्रख्यात लेखिका है कि अब लोकायुक्त जैसे ही प्रमाण ने उठाया
(34:44) वैसे ही पत्ता बिंदु के तरकश में हुआ था मुद्दा हो की प्रॉब्लम संचय नहीं कि तुम हो फिर और बुद्धिमान बता दूंगी जो इतना का जो तुमको यह श्री अनुसार और तेल का युधिष्ठिर तुम कहो इसका दोस्तों के साथ जरुर गिर तुम कहुं हो है पहली तो है इच्छा खुर्द दौड़ते जो हारने लगे कछुए द्वार से एक ब्राह्मण ने मन में सोचा होने वाला है न हारे हुए जो घोटाले का यह पक्ष सुने
(35:52) इस तरह थर्मल त मिट जाएगा निशांत झड़ जाएगा संसार में अधीर वाहन सुख संघ मुद्दे हैं [संगीत] जय हिंद सर कि रावण ने कहां कि निखारे होते हैं धुंध नाम के जैसा गर्म-गर्म में कोई संत फरीद ने कहा जो इच्छा है वह मांग लो देता हूं मैं वतन ऐ को सत्य जान लो रामधन ने कहा भी निर्णय श्रीचंद 2 जनवरी ने कहा भले ही शीषर्क ले लो इतना तुम मुझे आप हिस्ट्री मन खताओं होगा क्या मैं
(36:59) ऋषिकेश कुएं चुनाव विराट रूप कृष्ण ने अपना जौहर दिखाया फर्क न चरणों में शीश अपना झुकाने हुआ था श्रीकृष्ण ने का अगस्त शिविर ने चुनाव लड़ भूमि की बलि के लिए तुमको अर्जुन राणा रावण आमिर खन लिए तनख्वाह देख ले जाण निकल रे जलधि कमाया आपके मैं भाग्यवान हूं चरणों में अपके मकर राशि के अनुसार है यार तू इतनी सी है यह मेरी कामना ग्रहण देखने की आखिरी है मेरी भावना देता हूं लौंग बर्तन होंगे इस समय फूड इन
(38:10) थे कलियुग में होगा तेरा मेरे नाम से सुमिरन श्याम नाम तेरा घर घर में गूंजेगा मार खा जुबान होगा हुकुम कप सूजी गांव में संसार में डंका बजेगा तेरे नाम का संकट कटै का जो बिना मामले के मुताबिक इन थे संघ ने [संगीत] एकादशी व्रत कि तमाम अहम ताकत उन [संगीत] अधूरी लगाकर तुअर की शिकायत करके दान कृष्ण नौकरियां श्री कृष्ण उठती थीं कि अमृत पिला दिया हुआ था अ
(39:16) कि पर्वत पर रख चीन युद्ध कहल दिखाया आखिर शेयर पर वर्क ने पाया कि कलियुग में पूजा होती है श्याम नाम से आज भी रखा है श्याम खाटू धाम में दाने नहीं है कोई शाम सारा जहान उसने रहता सकता है श्याम भक्त कि प्राणों में धुंध है और सुनाओ प्रॉब्लम का वर्णन किया है हमने आधी रात अपने हमसे भी शाम को मनाते हैं निम्न अधिक उन्नत कोई पीड़ा और कष्ट सताए एक बार जो विश्राम के सरकार में आए हैं
(40:29) कि रखना तथा भक्त कहां पर अपने प्यार का साया वर्णन किया जो हमने है वह शाम की माया रखना सदा भक्तों को अपनी छत्रछाया में है धन जो रहते हैं समिति के गांव में तरह हमें मुंह आप भूल हम पर हो गई देना चमक सहानुभूति न [संगीत] धुंध मेरे को हुआ है [संगीत]
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