Thursday, January 30, 2025

मेरी विनय मान लीजे,


सभी अंग गुणहीन हूँ, या में यत्न ना कोई,
एक लाडली कृपा से, जो कछु होए सो होए॥

किशोरी मेरी विनय मान लीजे,
मेरी विनय मान लीजे,
मेरी विनय मान लीजे,
ओओओ मेरी विनय मान लीजे,

श्री राधे मेरी विनय मान लीजे,
किशोरी विनय मान लीजे,
ओओओ मेरी विनय मान लीजे,
मेरी विनय मान लीजे,
मेरी विनय मान लीजे,

डूब रही मझदार में नैया,
हे श्यामा डूब रही मझदार में नैया,
हे प्यारी तुम बिन कोई नहीं खिवैया,
हे लाड़ो तुम बिन कोई नहीं खिवैया,

नौका तो प्यारी मझधार में डूबी जा रही है। जो मौसो मौसी करो, तो मैं कहूं कठोर और जैसे हो वैसी करो। तो तुम हो रसिक सर मोर।
मैं जैसी हूं यदि मेरे साथ आप ऐसी करोगे, तो आप कठोर हो और जैसा आपका स्वभाव है जैसी आप दयालु कृपालु हो यदि ऐसी करोगी तो प्यारी इतना रहम जरूर करना 
क्या?

है मेरी बाह पकड़ लीजे। मेरी विनय मान लीजे 
है मेरी बाह पकड़ लीजे। मेरी विनय मान लीजे 
हां श्री राधे मेरी विनय मान लीजे,
हां किशोरी विनय मान लीजे,
ओओओ मेरी विनय मान लीजे,
मेरी विनय मान लीजे,
मेरी विनय मान लीजे,

अब क्या करो लाडली, वाह पड़कर अपने पास ही रख लो क्यों?
मैं करम हीन कछु आवत नांहि ,
मैं करम हीन कछु आवत नांहि ,
मैं कित जाऊ कोई मेरो नांही,
मैं कित जाऊ कोई मेरो नांही,

प्रारंभ में ही कहा न हो जिसका संगी साथी, तू उसका रखवाला है, जो निर्धन है जो निर्बल है। उसको तुमने पाला है। 
निर्धन का मतलब यही नहीं, के पैसा नहीं कुछ नहीं, निर्धन का मतलब ये, कि ईश्वर नाम, राधा नाम जीवन में नहीं जिसके, वह भी निर्धन ही है ।
मैं करम हीन कछु आवत नाहि ,
मैं करम हीन कछु आवत नाहि ,
मैं कित जाऊ कोई मेरो नाही,
मैं कित जाऊ कोई मेरो नाही,

प्यारी इतनी दयालु, इतनी कृपालु , इतना अनुकूल स्वभाव होने के बाद भी मैं कहां, किसका दर खटखटाऊं।
मैं करम हीन , कछु आवत नाही और आपसे ही कह रही हूं, मैं कहां जाऊं कोई मेरा नाही है।

हे मोहे शरण में रख लीजे 
मोहे मोहे शरण में रख लीजे 
मेरी विनय मान लीजे ।।
मोहे मोहे शरण में रख लीजे 
मेरी विनय मान लीजे ।।

श्री राधे मेरी विनय मान लीजे,
हां किशोरी विनय मान लीजे,
ओओओ मेरी विनय मान लीजे,
मेरी विनय मान लीजे,

क्यों 
मेरी विनय क्या मानो लाडली जी 
मैं हीन हूं अधीन हूं तुम्हारो बृज साहिब हूं 
कि हिय में मलिन करुणा की तोर करियो 
ओ हिय में मलिन करुणा की तोर करियो 

प्यारी मैं तेरे सामने हाथ जोड़कर विनती भी करूं और दीनता दिखाऊं यह संभव नहीं है, दीनता भी आपकी कृपा से ही आएगी।

हां हिय में मलिन करुणा की तोर करियो 
ओओओ भारी भवसागर में मूढत बचाओ मोही 
ओओओ भारी भवसागर में मूढत बचाओ मोही 
मेरे काम क्रोध लोभ मोह लागे सब हरि ओम
मेरे काम क्रोध लोभ मोह लागे सब हरि ओम

ओ मैं बुरो भलो जैसो तैसो तेरे द्वार आए पडो
ओ मैं बुरो भलो जैसो तैसो तेरे द्वार आए पडो
ओ मेरे गुण अवगुण को तू चित्त में न धरियो।
ओ मेरे गुण अवगुण को तू चित्त में न धरियो।

ओ कीरत किशोरी, वृषभान की दुहाई तोहे
ओ कीरत किशोरी, वृषभान की दुहाई तोहे


श्री राधे मैं अति दुखियारी ,
कहाँ जाऊ किस्मत कि मारी,
मोहे चरणों में रख लीजे,
मेरी विनय मान लीजे ।।

मैं अति दीन हीन श्री राधे
दीनन कि सुन लीजे राधे
मोह पे कृपा दृष्टि कीजे
मेरी विनय मान लीजे ।।

मैं अति दीन हीन श्री राधे,
दीनन की सुध लीजो राधे,
मोहे शरण में रख लीजे,

मेरी विनय मान लीजे।।
श्री राधे मेरी विनय मान लीजे।।

हे राधे, मैं अति दुखियारी,
कहाँ जाऊ किस्मत की मारी,
मोहे अब तो कृपा कीजे,

मेरी विनय मान लीजे।।

राधे राधे राधे राधे


श्यामा विनय मान लीजे,
मोहे अपनी कर लीजे, श्यामा विनय मान लीजे ॥






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(05:10) 

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