Friday, July 18, 2025

भजन | हर हर, महाँदेव शंभू, काशी, विश्वनाथ गंगे l

हर हर महादेव शंभू

हर हर, महादेव शंभू, काशी, विश्वनाथ गंगे l
हर हर, भूत नाथ शंभू, काशी, विश्वनाथ गंगे l
काशी, विश्वनाथ गंगे, सदाशिव, पार्वती संगे ll
हर हर, महादेव शंभू, काशी,
                               ( हाँ हाँ )
चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर, 
रामा भई संतन की भीर, 
तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक करे रघुवीर।

हर हर, महादेव शंभू, काशी, विश्वनाथ गंगे l
काशी, विश्वनाथ गंगे, सदाशिव, पार्वती संगे ll
हर हर, महादेव शंभू, काशी.........

ब्रज चौरासी कोस में, चार गाम निज धाम। 
रामा चार गाम निज धाम। 
वृन्दावन मधुपुरी, बरसाना और नंदगाव।।

हर हर, महादेव शंभू, काशी, विश्वनाथ गंगे l
काशी, विश्वनाथ गंगे, सदाशिव, पार्वती संगे ll
हर हर, महादेव शंभू, काशी.........

लाडो इतना दीजिये, जा में कुटुम समाय।
लाडो जा में कुटुम समाय
मैं भी भूखा न रहूँ, अर साधु ना भूखा जाय॥

हर हर, महादेव शंभू, काशी, विश्वनाथ गंगे l
काशी, विश्वनाथ गंगे, सदाशिव, पार्वती संगे ll
हर हर, महादेव शंभू, काशी.........





नमो, निरंजन, निराकार, "साकार बने अर्धंगा ll
पलित, कपोल, भाल उर राजत, पीए, हलाहल भंगा,
हर हर, महाँदेव शंभू, काशी,
                                      ( हाँ हाँ )
डिमिक, डिमिक डम, डमरू बाजे, ,गावत ताल तरंगा ll
ढिमिक, ढिमिक ढिम, बाजे पखावज़, मुरली, और मोरचंगा,
हर हर, महाँदेव शंभू, काशी,
                                  ( हाँ हाँ )
जटन, बीच में, गंगा नाचे, नाचत, भुजग भुजंगा ll
अपनी, धुन में, गणपति नाचे, नाचे, ऋद्धि सिद्धि संगा,
हर हर, महाँदेव शंभू, काशी,
                                  ( हाँ हाँ )
कैलाशी, काशी के वासी, "अमरनाथ, दुःख भंजन ll
उज्जैनी के, महाँकाल हैं, भक्तों, के चितरंजन,
हर हर, महाँदेव शंभू, काशी,
                               ( हाँ हाँ )
ब्रह्मा, नाचे, विष्णु नाचे, "नाचे, देवलोक सारा ll  
झूम, झूम के, नारद नाचे, गूंजे सदा जयकारा,
हर हर, महाँदेव शंभू, काशी,

हर हर महांदेव

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