Tuesday, October 21, 2025

बिना जानकी के राम अयोध्या न आएं

जब राम के लिए लक्ष्मण के लिए हनुमान जी जब संजीवनी बूटी लेकर आ रहे थे तो भारत में तीर मारा जिससे वे अयोध्या में गिर गए तब उन्होंने बताया कि लक्ष्मण मूर्छित है और उन्हें संजीवनी बूटी की आवश्यकता है 
तब सुमित्रा ने हनुमान से कहा 

धन्य है लखन जो उनकी गोदी में लेटा
रण में भेज दूंगी, अपना दूसरा भी बेटा 
रूकना ही होगा, रूकना ही होगा,  इन आंसुओंऽऽ को
मेरे लखन के प्राण जाए तो जाएं
मेरे लखन के प्राण जाए तो जाएं पर 
बिना जानकी के राम अयोध्या न आएं २

अब कौशल्या बोली
हे हनुमान रामसे वह मत कहना जीजी सुमित्रा कह रही है वह कहना जो मैं कह रही हूं।

धन्य है सुमित्रा जीजी, जो सबकुछ लुटा दी 
अरे मेरी ममता पेऽ, अपनीऽ ममता लुटा दी
हंस कर दे दिया, अपनी गोदी का गहना २
कष्ट राम उसकी खातिर पाए तो पाए 
कष्ट राम उसकी खातिर पाए तो पाए  पर 
बिना लखन केऽ राम, अयोध्या न आएं २

अब हनुमान जी बोलिए कहीं विलंब ना हो जाए मुझे जाना है तभी सामने केकई आ गई और बोली 
हे हनुमान रामसे वह मत कहना जी सुमित्रा और कैकेई जी कह रही है वह कहना जो मैं कह रही हूं।

अयोध्या की खुशियोंऽ में सहायक नहीं हूं 
और क्षमा मांगने केऽ लायक भी नहीं हूं २
अरे मेऽरीऽ वजह से उनको, पड़ा कष्ट सहना 
अयोध्या वाले मुझेऽ, अयोध्या वाले मुझेऽ, 
कलंकिनी कहें तो कहें 
बिना सिया लखन के राम अयोध्या न आएं

अब हनुमान जी बोलिए कहीं विलंब ना हो जाए मुझे जाना है तभी सामने उर्मिला हंसती हुई आई और बोली 

धरम धारा को धारण करता, वह रघुवंश का बेटा 
अरे मौत भी उसका है क्या बिगाड़े जो प्रभु की गोद में लेटा 
मैं सूर्यवंश की कुल वध हूं । श्रीलंका में उदित नहीं होंगे 
वे अपनी बहू को विधवा बनाने, स्वयं उदित नहीं होंगे
जो करने वो आए वह करना जरूरी 
रावण जैसे राक्षसों का मरना है जरूरी।



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